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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 July 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. दोराहे पर भारत की जनसांख्यिकी
  2. सहकारी संघवाद में नीति आयोग की भूमिका

सामान्य अध्ययन-III

  1. CRISPR जीन एडिटिंग के 10 साल
  2. नासा के जेम्स वेब से पहली छवि

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)

  1. तस्करी और गुलामी – मो फराह

 

प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. उम्र कोई बाधा नहीं
  2. कपड़ा उद्योग के लिए 5 एफ
  3. बाल यौन शोषण पर इंटरपोल की ICSE पहल
  4. डीजीसीए का ट्रांसजेंडर व्यक्ति को पायलट लाइसेंस देने से इनकार करना भेदभावपूर्ण: मंत्रालय
  5. सरकार ने FCRA साइट से एनजीओ का डेटा हटाया
  6. सॉवरेन वेल्थ फंड
  7. भारतीय वन अधिनियम, 1927 का गैर-अपराधीकरण
  8. नॉर्ड स्ट्रीम
  9. बायोमास से ग्रीन हाइड्रोजन

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

दोराहे पर भारत की जनसांख्यिकी: बुजुर्गों की संख्या युवाओं से अधिक होने की संभावना


संदर्भ: (यह जनसंख्या से संबंधित पिछले आर्टिकल का अगला भाग है।)

  • 2021-2036 के दौरान भारत की जनसँख्या में बुजुर्गों की हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, क्योंकि भारत की कुल आबादी में युवाओं की जनसंख्या का हिस्सा कम होना शुरू हो गया है।
  • ‘संयुक्त राष्ट्र अर्थशास्त्र एवं सामाजिक मामले विभाग (UN Department of Economics and Social Affairs – UNDESA) द्वारा वर्ष 1951 से प्रति दो वर्ष में ‘विश्व जनसंख्या संभावनाएं’ (World Population Prospects – WPP) जारी की जाती हैं।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

Current Affairs

 

  • युवा आबादी में कमी: वर्ष 2021 में, भारत की कुल आबादी में 15-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की जनसंख्या 2 प्रतिशत जनसंख्या रही, जिसके वर्ष 2036 तक घटकर 22.7 होने की उम्मीद है।
  • ‘सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय’ द्वारा जारी ‘यूथ इन इंडिया 2022’ (Youth in India 2022) रिपोर्ट के अनुसार, देश में सर्वाधिक आबादी वाले राज्यों- बिहार और उत्तर प्रदेश – में जहां वर्ष 2021 तक कुल जनसंख्या में युवा आबादी के अनुपात में वृद्धि देखी गयी है, किंतु आगामी वर्षों में इसमें गिरावट देखने की उम्मीद है।
  • रिपोर्ट के अनुसार- केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में 2036 तक युवाओं की तुलना में अधिक बुजुर्ग आबादी देखने का अनुमान है।
  • बिहार और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में देश के आधे से अधिक (52 प्रतिशत) युवा आबादी होने का अनुमान है।
  • जनसंख्या वृद्धि में उतार-चढ़ाव: वर्ष 2021 तक कुल युवा आबादी 37 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है और उसके बाद इसमें कमी आएगी।
  • कुछ राज्यों में बुजुर्ग आबादी में वृद्धि: केरल में, जहां युवा आबादी अन्य राज्यों की तुलना में पहले चरम पर थी, हालिया रिपोर्ट क अनुसार- वर्ष 2021 में राज्य की कुल जनसँख्या में 1 प्रतिशत युवा आबादी की तुलना में बुजुर्गों की आबादी का हिस्सा 16.5 प्रतिशत होने का अनुमान है।

संबंधित मुद्दे:

Current Affairs

जनसांख्यिकीय लाभांश:

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार, ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ (Demographic Dividend) का अर्थ, जनसंख्या की आयु संरचना में बदलाव के परिणामस्वरूप होने वाली ‘आर्थिक विकास क्षमता’ (Economic Growth Potential) से है। मुख्यतः जब कामकाजी उम्र (15 से 64 आयु वर्ग) की आबादी का हिस्सा, आबादी के गैर-कामकाजी-आयु हिस्सा (14 और उससे कम, और 65 और अधिक उम्र) से अधिक होता है, तब इसे ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ कहा जाता है।

इंस्टा लिंक्स:

विश्व जनसंख्या संभावनाएँ (WPP) 2022

अभ्यास प्रश्न:

जब तक कि हमारी जनशक्ति अधिक शिक्षित, जागरूक, कुशल और रचनात्मक नहीं हो जाती- भारत में जनसांख्यिकी लाभांश केवल सैद्धांतिक रहेगा। हमारी जनसंख्या क्षमता को अधिक उत्पादक और रोजगार योग्य बनाने के लिए सरकार द्वारा क्या उपाय किए गए हैं? (यूपीएससी 2016)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग सुनिश्चित करने में नीति आयोग की भूमिका


संदर्भ:

वर्ष 2015 में अपनी स्थापना के बाद से ‘नीति आयोग’ प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने में सहायक रहा है।

  • नीति आयोग द्वारा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘शासी परिषद’ (Governing Council) की वार्षिक बैठक आयोजित की जाती है, जिसमे राष्ट्रीय विकास एजेंडा का कार्यान्वयन करने हेतु अंतर-क्षेत्रीय, अंतर-विभागीय और संघीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री/उपराज्यपाल भाग लेते हैं।
  • वर्ष 2022 की ‘शासी परिषद’ बैठक के लिए तैयारी के रूप में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन 15-17 जून से धर्मशाला में आयोजित किया गया था।

नीति आयोग के सात प्रस्ताव:

  1. राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के नेतृत्व में विकास: भारत का विकास, उसके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का विकास है। क्षेत्रीय नीति के संरक्षक और विकास कार्यक्रमों के प्रमुख निष्पादक के रूप में, राज्य भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास चालक हैं।
  2. आय अभिसरण (Income Convergence): देश के भीतर अधिक सामाजिक-आर्थिक सामंजस्य हासिल करने के लिए, राज्यों में आय अभिसरण प्राप्त करना एक नीतिगत प्राथमिकता होनी चाहिए।
  3. सामाजिक संकेतक: आय वृद्धि के अलावा, ‘सामाजिक संकेतकों पर प्रदर्शन’ राज्य के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक अच्छा मापक है। कई राज्यों में सामाजिक परिणामों को आय से अलग कर दिया गया है। शिशु मृत्यु दर (IMR) पर मिजोरम का प्रदर्शन इसका एक उदाहरण है।
  4. जमीनी स्तर से विकास: हमें महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय और अंतर-जिला भिन्नताओं को संबोधित करते हुए यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि विकास जमीनी स्तर से हो।
  5. बेहतर शहरीकरण: राज्यों के विकास के लिए बेहतर प्रबंधित शहरीकरण महत्वपूर्ण है। शहरों को किफायती आवास, जल आपूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  6. नीति आयोग की मध्यस्थ के रूप में भूमिका: भारत के राज्यों द्वारा पहले से ही कई सर्वोत्तम पद्धतियों को लागू किया जा रहा है। नीति आयोग को केंद्र और राज्यों के बीच एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करना चाहिए ताकि इन सर्वोत्तम प्रथाओं, अंतर्दृष्टि और दृष्टिकोणों को परस्पर साझा किया जा सके। कुछ क्षेत्र जो विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं, वे हैं ब्लॉकचैन और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके उन्नत तकनीक का उपयोग, सामाजिक रजिस्ट्री का विकास, अनुपालन बोझ को कम करना, पीएम गति शक्ति का कार्यान्वयन, छोटे अपराधों को कम करना और व्यापार करने में आसानी को बढ़ाने के लिए कानूनों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
  7. जलवायु परिवर्तन से निपटना: जलवायु परिवर्तन से निपटने की चुनौती हम पर है। दुनिया ने अब तक विकास के दो मॉडल देखे हैं- ‘औद्योगिक क्रांति’ और ‘पूर्वी एशिया का उदय’। दोनों मॉडल सस्ते, जीवाश्म-ईंधन ऊर्जा पर निर्भर थे। भारत समान रूप से तेजी से बढ़ने की आकांक्षा रखता है लेकिन अब कार्बन- बाध्यताओं के अधीन है।

इंस्टा लिंक्स:

नीति आयोग

अभ्यास प्रश्न:

हाल के वर्षों में सहकारी संघवाद की अवधारणा पर जोर दिया जा रहा है। मौजूदा ढांचे में कमियों को उजागर कीजिए और सहकारी संघवाद किस हद तक कमियों का जवाब देगा। (यूपीएससी 2015)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

CRISPR जीन एडिटिंग के 10 साल


संदर्भ: 10 साल पहले वर्ष 2012 में, जेनिफर डौडना (Jennifer Doudna) और इमैनुएल चारपेंटियर (Emmanuelle Charpentier) द्वारा अपनी खोज प्रकाशित की थी, जिसमे बताया गया था, कि जीनोमिक डीएनए को संपादित करने के लिए CRISPR-Cas9 को RNA के साथ प्रोग्राम किया जा सकता है, जिसे अब जीव विज्ञान के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक माना जाता है।

  • CRISPR-Cas9: ‘क्लस्टर नियमित रूप से इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट एसोसिएटेड प्रोटीन 9’ (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats Associated protein 9)।
  • CRISPR जीन एडिटिंग, एक जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक है जिसके द्वारा जीवित जीवों के जीनोम को संशोधित किया जा सकता है।

यह बैक्टीरियल CRISPR-Cas9 एंटीवायरल डिफेंस सिस्टम के सरलीकृत संस्करण पर आधारित है। एक कोशिका में एक ‘सिंथेटिक गाइड आरएनए’ (guide RNA – gRNA) के साथ Cas9 एंजाइम वितरित करके, कोशिका के जीनोम को वांछित स्थान पर काटा जा सकता है।

  • ‘जीनोम’ किसी जीव में अनुवांशिक जानकारी का पूरा सेट होता है। जीनोम को डीएनए के लंबे अणुओं में संग्रहित किया जाता है जिन्हें क्रोमोसोम कहा जाता है।
  • अन्य जीनोम संपादन प्रणालियों में टैलेन (TALENs), जिंक-फिंगर न्यूक्लीज (Zinc-Finger Nucleases) आदि शामिल हैं।

इंस्टा लिंक

CRISPR-Cas9 क्या है?

अभ्यास प्रश्न:

CRISPR जीन-एडिटिंग तकनीक और इसके द्वारा उत्पन्न चिंताओं पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: टाइम

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा के जेम्स वेब टेलिस्कोप द्वारा लिया गया पहला चित्र


संदर्भ: नासा के नई अंतरिक्ष दूरबीन – जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb space telescope) द्वारा भेजा गया पहला चित्र अब तक कैप्चर किए गए ब्रह्मांड का सबसे गहरा रूप प्रस्तुत करती है।

‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ (James Webb space telescope JWST) के बारे में:

‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’, अंतरिक्ष में परिक्रमा करती हुए एक अवरक्त वेधशाला (Infrared Observatory) है, जो वर्तमान में अंतरिक्ष में कार्यरत ‘हबल अंतरिक्ष दूरबीन’ (Hubble space telescope) से कहीं अधिक शक्तिशाली है।

  • JSWT, स्पेक्ट्रम के दृश्य भाग (हबल के विपरीत) में प्रकाश के बजाय ‘निकट-अवरक्त प्रकाश’ में अवलोकन करेगा और इस प्रकार अस्पष्ट सितारों और आकाशगंगाओं को देखने की इसकी क्षमता बहुत अधिक होगी।
  • सहयोग: जेडब्लूएसटी, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency) और केनेडियन अंतरिक्ष एजेंसी (Canadian Space Agency) का एक संयुक्त उपक्रम है।
  • इससे पूर्व, जेडब्ल्यूएसटी (JWST) को एनजीएसटी (New Generation Space Telescope – NGST) के नाम से जाना जाता था, फिर वर्ष 2002 में इसका नाम बदलकर नासा के पूर्व प्रशासक ‘जेम्स वेब’ के नाम पर कर दिया गया|

 

नई खगोलीय खोजों का महत्व:

  • अतीत पर एक दृष्टि: JSWT द्वारा भेजे गए चित्र के एक भाग में कुछ ‘प्रकाश’ देखा जा रहा है, जोकि लगभग 13.8 अरब साल पहले हुई ‘बिग बैंग’ परिघटना के बाद का बताया जा रहा है।
  • जेम्स वेब टेलिस्कोप, ब्रह्मांड में अत्यंत दूरस्थ आकाशगंगाओं की तलाश में ‘बिग बैंग’ के ठीक बाद के समय में पीछे की ओर देख सकता है। ये आकाशगंगाएं ब्रह्मांड में इतनी दूर स्थित है, कि प्रकाश को इन आकाशगंगाओं से हमारी दूरबीनों तक पहुंचने में कई अरब वर्ष लग गए।
  • अंतरिक्ष में JSWT में सबसे बड़ा दर्पण लगाया गया है और यह ब्रह्मांड में गहराई से- और इस प्रकार समय में आगे – अवलोकन करेगा।
  • ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाना: जैसे कि, बिग बैंग के बाद एक नैनोसेकंड से भी कम समय में ब्रह्मांड का विस्तार किस प्रकार हुआ।
  • ब्रह्मांड के अंध-युग का अन्वेषण: गुरुत्वाकर्षण द्वारा पहले सितारों और आकाशगंगाओं का निर्माण करने तथा इनके द्वारा अंततः पहली बार प्रकाश का उत्सर्जन करना शुरू करने से पहले की अवधि को ‘अंध-युग’ (Dark Ages) कहा जाता है।
  • ग्रहीय प्रणाली की संरचना को समझना और एक्सोप्लैनेट पर जीवन के संकेतों की तलाश करना: JSWT अपने विशाल दर्पण और बेहतर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ उपकरण के कारण इस उद्देश्य को बहुत अधिक सटीकता के साथ प्राप्त कर सकता है।

‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ और ‘हबल टेलीस्कोप’ के बीच अंतर-

  1. कक्षा (Orbit): JSWT यह पृथ्वी की परिक्रमा नहीं करेगा बल्कि ‘लैग्रेंज प्वाइंट 2’ (लाखों किलोमीटर से अधिक दूर) पर स्थिर अवस्था में रहेगा। जबकि ‘हबल टेलीस्कोप’, 597 किमी की उंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में परिक्रमण करता है। JSWT की अंतरिक्ष में अवस्थित इसे सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के प्रकाश से बचाएगी और इस प्रकार यह ‘प्रकाश के व्यतिकरण’ (light interference) से बच जाएगा।
  2. प्रकाश दर्पण: JSWT के प्रकाश दर्पण का व्यास (6.5 मीटर) काफी अधिक है, और यह ‘हबल’ की तुलना में 6 गुना अधिक प्रकाश को पकड़ने में सक्षम है। यह पुरानी और दूर स्थित आकाशगंगाओं का अध्ययन करने में सक्षम होगा, जो वर्तमान में ‘हबल’ के साथ संभव नहीं है। इसकी तुलना में ‘हबल टेलीस्कोप’ के दर्पण का व्यास मात्र 2.4 मीटर है।
  3. क्षमता: JSWT, हबल की तुलना में 100 गुना अधिक शक्तिशाली है। ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’, बिग बैंग के 250 मिलियन वर्ष बाद की छवियों को दिखाएगा और हमें ब्रह्मांड के शुरुआती बिंदु के करीब ले जाएगा। ‘हबल टेलीस्कोप,’ बिग बैंग के 400 मिलियन वर्ष बाद निर्मित छवियों को दिखाता है।
  4. स्पेक्ट्रम: ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ का स्पेक्ट्रम ‘इन्फ्रारेड’ है – यह दूर के स्थानों में वस्तुओं के बारे में स्पष्ट विवरण प्रकट करेगा। अलंकारिक भाषा में, ‘हबल टेलीस्कोप’ केवल “शिशु आकाशगंगाओं” (toddler galaxies) को देख सकता है और जेम्स वेब टेलीस्कोप “बाल आकाशगंगाओं” (baby galaxies) को देखने में सक्षम होगा। ‘हबल टेलीस्कोप’ अधिकतर पराबैंगनी (दृश्यमान) स्पेक्ट्रम का उपयोग करता है।

ब्रह्मांड का अन्वेषण करने हेतु अन्य मिशन:

  1. हबल स्पेस टेलीस्कोप (1990): दृश्यमान और पराबैगनी प्रकाश में प्रेक्षण।
  2. कॉम्पटन गामा-रे वेधशाला (Compton Gamma-Ray Observatory – CGRO): गामा किरणों में प्रेक्षण
  3. चंद्रा एक्स-रे वेधशाला (Chandra X-Ray Observatory – CXO)
  4. SPHEREx (2023 में लॉन्च किया जाएगा): इसका उद्देश्य जीवन के मूल सिद्धांतों – जैसे कि आकाशगंगाओं के भीतर पानी और कार्बनिक पदार्थ- की खोज करना है।
  5. वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे टेलीस्कोप (WFIRST, 2027 में लॉन्च किया जाएगा): इसका उद्देश्य डार्क एनर्जी का अध्ययन करना, एक्सोप्लैनेट का पता लगाना और गैलेक्टिक और एक्स्ट्रागैलेक्टिक सर्वेक्षण करना है।

इंस्टा लिंक

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

अभ्यास प्रश्न:

जेम्स वेब टेलिस्कोप सहयोग विज्ञान और मानव मतिसूक्ष्मता का एक उदाहरण है। वैज्ञानिक समुदाय के लिए इसके महत्व की चर्चा कीजिए। (10 अंक)

स्रोत: द हिंदू

 


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री


तस्करी और गुलामी – मो. फराह

संदर्भ:

बीबीसी के एक वृत्तचित्र में, सर मोहम्मद फराह ने खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें एक बच्चे के रूप में अवैध रूप से यूनाइटेड किंगडम लाया गया था, और उन्हें मोहम्मद फराह नाम दिया गया था। जो लोग उन्हें तस्करी के माध्यम से लाए थे, उन लोगों ने उन्हें घरेलू नौकर के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया था। उनका असली नाम ‘हुसैन अब्दी काहिन’ है।

  • सर मोहम्मद कहते हैं कि अगर उन्हें खाने के लिए खाना चाहिए होता था, तो उन्हें घर का काम और बच्चों की देखभाल करनी पड़ती थी।
  • पहले कुछ वर्षों में, उनके मालिक परिवार ने उन्हें स्कूल जाने की अनुमति नहीं दी, लेकिन जब वह लगभग 12 वर्ष के थे, तो उन्होंने फेलथम कम्युनिटी कॉलेज में सातवें वर्ष में दाखिला लिया।
  • सर मोहम्मद कहते हैं कि ‘खेल’ उनके लिए एक जीवन रेखा थी क्योंकि “इस [जीवन स्थिति] से दूर होने के लिए मैं केवल एक ही काम कर सकता था, वह था बाहर निकलना और दौड़ना”।
  • उन्होंने अंततः अपने शारीरिक शिक्षा शिक्षक को अपनी पहचान, उनकी पृष्ठभूमि और उस परिवार के बारे में बताया जिसके लिए वह मजबूरी में काम करते थे।
  • यह उदाहरण संघर्ष, दृढ़ संकल्प, कभी न मरने वाली भावना और नम्रता के मूल्यों पर प्रकाश डालता है।

 


प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य


उम्र कोई बाधा नहीं

‘उम्र, कोई बाधा नहीं’ (age has no bar) का ताजा उदाहरण देते हुए केरल के एक 82 वर्षीय पूर्व विधायक और सीपीएम के दिग्गज ‘एमजे जैकब’ ने वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप (डब्ल्यूएमएसी) 2022 में भारत के लिए दो कांस्य पदक जीते हैं।

स्वस्थ जीवन शैली का लगन से पालन:

पिरावोम के ‘एमजे जैकब’ ने पुरुषों के ‘एम80 वर्ग’ में 200 मीटर और 80 मीटर बाधा दौड़ में पदक जीते। अब वह अपनी फिटनेस पर अधिक काम करने, अपने प्रदर्शन में सुधार करने और 2023 में मास्टर्स में स्वर्ण जीतने की योजना बना रहे है।

फूल अपशिष्ट पुनर्चक्रण

बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति ने काशी विश्वनाथ और जगन्नाथपुरी मंदिरों से प्रेरणा लेते हुए फूलों के कचरे, चमड़े के वैगन और अन्य बायोडिग्रेडेबल सामग्री से अगरबत्ती बनाने का फैसला किया है।

 

कपड़ा उद्योग के लिए 5 एफ

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के कपड़ा उद्योग को दुनिया में एक मजबूत नाम बनाने हेतु फैशन उद्योग के लिए 5 एफ (5 F) – फार्म्स टू फाइबर टू फैब्रिक टू फैशन टू फॉरेन एक्सपोर्ट- का मंत्र दिया है।

 

बाल यौन शोषण पर इंटरपोल की ICSE पहल

भारत का ‘केंद्रीय जांच ब्यूरो’ इंटरपोल की ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल यौन शोषण’ (International Child Sexual Exploitation – ICSE) पहल में शामिल हो गया है। यह सीबीआई को, विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से अन्य देशों के जांचकर्ताओं के साथ ऑनलाइन बाल यौन शोषण का पता लगाने और ऑडियो-विज़ुअल क्लिप से दुर्व्यवहार करने वालों, पीड़ितों और अपराध के दृश्यों की पहचान करने की सविधा देगा।

  • ICSE डेटाबेस, बाल यौन शोषण सामग्री (CSEM) का विश्लेषण करने और पीड़ितों, दुर्व्यवहार करने वालों और स्थानों के बीच संबंध बनाने के लिए वीडियो और चित्र तुलना का उपयोग करता है।
  • दोहराव से बचाव और सहयोग: डेटाबेस, प्रयासों के दोहराव से बचाता है और जांचकर्ताओं को यह बताकर कीमती समय बचाता है कि क्या चित्रों की एक श्रृंखला पहले ही किसी अन्य देश में खोजी या पहचानी जा चुकी है, या क्या इसमें अन्य चित्रों के समान विशेषताएं हैं।
  • आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर 155 मिनट में 16 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार होता है। यौन शोषण करने वाले बच्चों के माता-पिता समाज में बदनाम होने के डर से किसी को बताने से डरते हैं।
  • पहले, सीबीआई ने CSEM डेटा का उपयोग करने के लिए ‘ऑनलाइन बाल यौन शोषण और शोषण रोकथाम/जांच (OCSAE) इकाई की स्थापना की थी।

 

डीजीसीए का ट्रांसजेंडर व्यक्ति को पायलट लाइसेंस देने से इनकार करना भेदभावपूर्ण: मंत्रालय

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा ‘विमानन नियामक’ जारी एक पत्र में कहा गया है कि, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा एक ट्रांसजेंडर उम्मीदवार को एक वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस से वंचित करना “भेदभावपूर्ण” है और ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों पर कानून का “उल्लंघन” करता है।

  • मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर उम्मीदवार को पेशे में शामिल होने के लिए सक्षम करने के लिए लाइसेंस और अलग चिकित्सा मानकों के लिए दिशा-निर्देशों की मांग की है।
  • DGCA द्वारा एक ट्रांसजेंडर ‘एडम हैरी’ को पायलट लाइसेंस देने से इनकार करने के कारण यह मुद्दा सुर्खियों में आया था।

 

सरकार ने FCRA साइट से एनजीओ का डेटा हटाया

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने अपने विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) वेबसाइट से कुछ महत्वपूर्ण डेटा को हटा दिया है, जिसमें गैर सरकारी संगठनों के वार्षिक रिटर्न सहित गैर सरकारी संगठनों की सूची शामिल है जिनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।

प्रभाव: यह FCRA डिवीजन के कामकाज में पारदर्शिता को कम करेगा (ऐसे समय में जब FCRA डिवीजन के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है)।

हाल ही में, मंत्रालय ने “एनजीओ पर अनुपालन के बोझ को कम करने के प्रयास” में एफसीआरए नियमों में कई बदलावों को अधिसूचित किया था। इनमें विदेशी योगदान की प्राप्ति की घोषणा” से संबंधित नियम 13 में बदलाव भी शामिल हैं।

विवाद: ग्रह मंत्रालय ने मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी और ऑक्सफैम इंडिया के FCRA लाइसेंस के नवीनीकरण के आवेदन को खारिज कर दिया था और हाल ही में कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव का लाइसेंस रद्द कर दिया था।

इंस्टा लिंक: एफसीआरए

 

सॉवरेन वेल्थ फंड

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, देशों के लिए अपने ‘सॉवरेन वेल्थ फंड’ (Sovereign wealth funds – SWF) के माध्यम से निवेश करने के लिए फायदेमंद रही हैं।

  • ‘सॉवरेन वेल्थ फंड’ से निवेश करने वाले शीर्ष 10 देशों में से छह तेल समृद्ध अर्थव्यवस्थाएं हैं।
  • ‘संप्रभु धन निधि’ (Sovereign wealth funds – SWF), किसी देश के स्वामित्व वाला निवेश कोष होता है इस निवेश कोष में सरकार द्वारा अर्जित धन शामिल होता है, जो प्रायः देश के अधिशेष भंडार से प्राप्त होता है।
  • उपयोग: नॉर्वे जैसे तेल समृद्ध देश, पश्चिम एशिया के लोग, और चीन जैसे अन्य देश, देश और विदेश दोनों में व्यवसायों में निवेश करने के लिए SWF का उपयोग करते हैं।

 

भारतीय वन अधिनियम, 1927 का गैर-अपराधीकरण

MoEFCC भारतीय वन अधिनियम, 1927 को अपराध से मुक्त करने की समीक्षा कर रहा है।

  • भारतीय वन अधिनियम, 1927: इस अधिनियम के तहत, वनों को तीन श्रेणियों -आरक्षित वन, संरक्षित वन और ग्रामीण वन- में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह अधिनियम वनवासियों द्वारा वन उपज के संग्रह को विनियमित करने का प्रयास करता है और कुछ गतिविधियों को अपराध घोषित किया गया है। इस नीति में वनों पर राज्य नियंत्रण स्थापित करने के लिए कारावास और जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
  • सुझाए गए परिवर्तन: वन क्षेत्रों में आग जलाने या आग को कम करने, लकड़ियों को काटने और घसीटने को अपराध की श्रेणी से बाहर करना; अधिनियम का उल्लंघन करने पर केवल 500 रुपये का जुर्माना लगेगा (पहले यह छह महीने की कैद और जुर्माना था)।
  • इससे पहले, मंत्रालय ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के मौजूदा प्रावधानों को अपराध से मुक्त करने का प्रस्ताव दिया था ताकि साधारण उल्लंघनों (उदाहरण के लिए एकल-उपयोग-प्लास्टिक पर प्रतिबंध का उल्लंघन) के लिए कारावास के भय को समाप्त किया जा सके।

 

 

नॉर्ड स्ट्रीम

इस बात की आशंका है कि रूस के खिलाफ मौजूदा प्रतिबंधों के प्रतिशोध में, रूस द्वारा नॉर्ड स्ट्रीम 1 (जर्मनी का रूस से गैस का मुख्य स्रोत) के हालिया बंद को आगे बढ़ाया जा सकता है।

नॉर्ड स्ट्रीम 1 (Nord Stream 1), पानी के भीतर एक 1,224 किमी लंबी गैस पाइपलाइन है जो उत्तर पश्चिमी रूस में वायबोर्ग से बाल्टिक सागर के माध्यम से पूर्वोत्तर जर्मनी में लुबमिन तक पहुचती है।

नॉर्ड स्ट्रीम का महत्व:

  • यह पाइपलाइन रूस की गैस के जर्मनी में प्रवेश करने और फिर अन्य यूरोपीय देशों के लिए तटवर्ती लिंक के माध्यम से पश्चिम और दक्षिण की ओर पहुचने का मुख्य मार्ग है।
  • नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन, जो जर्मनी में रूसी गैस के प्रवाह को दोगुना कर देती, फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण निलंबित कर दी गई।

बायोमास से ग्रीन हाइड्रोजन

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने बायोमास से हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए एक तकनीक विकसित की है

  • यह स्वदेशी तकनीक भारत सरकार की एक पहल, आत्मानिर्भर भारत, राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा रोडमैप के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है, जिसका उद्देश्य ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करना है।
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने परियोजना को सहयोग प्रदान किया है।