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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 July 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. आईटी अधिनियम की धारा 69A
  2. शासन व्यवस्था: एक समावेशी समाज के लिए डिजिटलीकरण
  3. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए रैंकिंग
  4. जाति जनगणना

सामान्य अध्ययन-III

  1. क्रिप्टो-परिसंपत्तियों में बाजार
  2. ग्लोबल फाइंडेक्स डेटाबेस 2021

सामान्य अध्ययन-IV

  1. सेलिब्रिटी एंडोर्सर्स की जिम्मेदारी

 

मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध):

  1. नुपी कीथेल: द मदर्स मूवमेंट ऑफ मणिपुर
  2. सर सैयद अहमद खान और मौलाना आजाद – ईशनिंदा की प्रतिक्रिया

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. भारत में खिलौने
  2. पांच समुदायों के लिए ‘मूल निवासी’ का दर्जा
  3. वल्बाचिया बैक्टीरिया
  4. फिशबोन चैनल वृक्षारोपण विधि

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

आईटी अधिनियम की धारा 69A


संदर्भ:

हाल ही में, ट्विटर ने अपने प्लेटफ़ॉर्म से कुछ सामग्री को हटाने का आदेश देने वाले कुछ सरकारी आदेशों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 (A):

 आईटी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 69 (A) के अंतर्गत केंद्र सरकार के लिए ‘सोशल मीडिया मध्यस्थों’ को ब्लॉकिंग आदेश जारी करने की अनुमति प्रदान की गयी है।

ब्लॉकिंग ऑर्डर केवल निम्लिखित विषयों के संदर्भ में जारी किया जा सकते हैं:

  • भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में
  • भारत की रक्षा
  • राज्य की सुरक्षा
  • विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध
  • सार्वजनिक व्यवस्था
  • उपरोक्त से संबंधित किसी भी संज्ञेय अपराध को करने के लिए उकसाने को रोकने के लिए।

प्रक्रिया:

  • सरकार द्वारा किए गए किसी भी अनुरोध को एक समीक्षा समिति को भेजा जाता है, यह समिति भेजे गए अनुरोध का अवलोकन करने के उपरांत इन निर्देशों को जारी करती है।
  • आईटी अधिनियम की धारा 69 (A) के तहत जारी ब्लॉकिंग आदेश आमतौर पर प्रकृति में गोपनीय होते हैं।

ट्विटर द्वारा मुकदमा दायर किए जाने का कारण:

ट्विटर ने दावा किया है, कि अधिनियम की धारा 69 (A) के तहत कई ब्लॉकिंग आदेश प्रक्रियात्मक और मूलभूत रूप से दोषपूर्ण हैं:

  • उदाहरण के लिए, उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को हटाने से पहले उन्हें पूर्व सूचना नहीं देना।
  • इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) यह प्रदर्शित करने में विफल रहा है कि वह जिस सामग्री को हटाना चाहता है वह धारा 69 (ए) के दायरे में किस प्रकार आती है।
  • मंत्रालय द्वारा चिह्नित की गई कुछ सामग्री राजनीतिक दलों के आधिकारिक खातों से संबंधित हो सकती है, जिसे अवरुद्ध (ब्लॉक) करना ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

इंस्टा लिंक

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

अभ्यास प्रश्न:

संविधान के अनुच्छेद 19 के कथित उल्लंघन के संदर्भ में, आईटी अधिनियम की धारा 66A पर चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2013)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

शासन व्यवस्था: एक समावेशी समाज के लिए डिजिटलीकरण

संदर्भ:

डिजिटल इंडिया (2015) के लॉन्च होने के सात साल बाद, ‘डिजिटल-फर्स्ट’ अर्थव्यवस्था पर जोर देने के लिए ‘डिजिटल इंडिया वीक’ मनाया जा रहा है।

देश को “डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था” में बदलने के लिए ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया गया था।

Current Affairs

व्यक्तियों को देश के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने के लिए किए गए उपाय:

  • जन धन-आधार-मोबाइल (Jan Dhan-Aadhaar-Mobile: JAM) पहल: यह पहल एक अरब से अधिक भारतीय नागरिकों को ‘डिजिटल पहचान’ प्रदान करती है।
  • एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (Unified Payments Interface – UPI): UPI उन लाखों भारतीयों के लिए देश की बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच प्रदान करता है, जिन्हें पहले औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर रखा गया था।
  • व्हाट्सएप (WhatsApp): यह खुद को भारत के डिजिटल सहयोगी के रूप में देखता है:
  • महामारी के दौरान ‘स्व-रोजगार महिला संघ’ (Self Employed Women’s Association – SEWA) के साथ काम किया।
  • कश्मीर में महिला किसानों ने वैकल्पिक ‘आपूर्ति-श्रृंखला’ बनाने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया।
  • हज़ारों किलोग्राम सेब और चेरी बेचने के लिए गुजरात में ग्राहकों से जुड़ाव।

व्यवसायों का डिजिटलीकरण:

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) एक लचीली राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। इनका देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग एक तिहाई हिस्सा होता है।

  • ‘व्हाट्सऐप फॉर बिज़नेस ऐप’ (WhatsApp for Business App) के माध्यम से, लाखों छोटे व्यवसाय अपने ‘क्लाइंट बेस’ और ‘रेवेन्यू स्ट्रीम’ में वृद्धि करते हैं।
  • नागौर, राजस्थान में स्थित ‘जीवन हस्तशिल्प’ स्थानीय महिला कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए उपयोग किए जा रहे ‘ऐप’ (App) का एक उदाहरण है।

भुगतान और वित्तीय समावेशन:

  • यूपीआई पर डिजिटल भुगतान को अपनाने से ‘शहरी उत्साह से लेकर ग्रामीण जरूरतों’ तक वित्तीय साक्षरता की गति तेजी से आगे बढ़ी है।
  • व्हाट्सएप के पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य कर्नाटक और महाराष्ट्र के 500 गांवों को ‘व्हाट्सएप पर भुगतान’ के माध्यम से डिजिटल भुगतान तक पहुंच के साथ सशक्त बनाना है, और इसमें नागरिकों को यूपीआई के लिए साइन अप करने, यूपीआई खाता बनाने और डिजिटल भुगतान का उपयोग करते समय सुरक्षा संबंधी सर्वोत्तम पद्धतियों जैसे पहलुओं पर शिक्षित करने वाले ‘ऑन-ग्राउंड फैसिलिटेटर’ शामिल होंगे।

कुशल ई-गवर्नेंस के लिए नागरिक सेवाएं:

  • सरकार के साथ साझेदारी में व्हाट्सएप पर ‘MyGov कोरोना हेल्पडेस्क चैटबॉट’ कोविड-संबंधी प्रामाणिक जानकारी और ‘टीकाकरण-संबंधी संसाधनों तक पहुँचने के लिए वन-स्टॉप समाधान बन गया है।
  • MyGov हेल्पडेस्क में अब ‘डिजिलॉकर’ सेवाएं भी शामिल हैं, जो आधिकारिक दस्तावेजों तक त्वरित पहुंच प्रदान करती हैं।

Current Affairs

 

इंस्टा लिंक्स:

डिजिटल परिवर्तन

अभ्यास प्रश्न

सूचना प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं/कार्यक्रमों का कार्यान्वयन आमतौर पर कुछ महत्वपूर्ण कारकों के रूप में प्रभावित होता है। इन कारकों की पहचान कीजिए और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपाय सुझाएं। (यूपीएससी 2019)

स्रोत: लाइव मिंट

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए रैंकिंग

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री द्वारा भारत में खाद्य पोषण और सुरक्षा विषय पर आयोजित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान ‘NFSA के लिए राज्य रैंकिंग सूचकांक, 2022′ (State Ranking Index for NFSA, 2022)  जारी किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • सामान्य श्रेणी के राज्यों में ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के लिए राज्य रैंकिंग सूचकांक’ में ओडिशा को शीर्ष स्थान पर रखा गया है, इसके बाद उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर और आंध्र प्रदेश तीसरे स्थान पर है।
  • विशेष श्रेणी के राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में त्रिपुरा पहले स्थान पर और उसके बाद क्रमश: हिमाचल प्रदेश और सिक्किम हैं।
  • अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सूचकांक में अच्छा प्रदर्शन किया है। इस सूचकांक के निष्कर्षों से पता चलता है कि अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने डिजिटलीकरण, आधार सीडिंग और ‘ePoS इंस्टॉलेशन’ में अच्छा प्रदर्शन किया है, जो सुधारों की ताकत और व्यापकता को दोहराता है।

कुछ क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निम्नलिखित कुछ क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा-

  • प्रकिया, जैसे कि सामाजिक अंकेक्षण का पूर्ण रूप से संचालन और दस्तावेजीकरण।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘राज्य खाद्य आयोगों के कार्य संचालन’।

सूचकांक का महत्व:

  • NFSA की प्रभावशीलता का मापक: सूचकांक का वर्तमान संस्करण ‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (TPDS) के तहत संचालन, और पहल के माध्यम से प्रमुख रूप से NFSA कार्यान्वयन की प्रभावशीलता को मापता है।
  • स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा: रैंकिंग से NFSA- जिसे खाद्य कानून भी कहा जाता है- के तहत राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। इस क़ानून के तहत केंद्र लगभग 80 करोड़ लोगों को अत्यधिक सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।
  • सरकार, प्रति व्यक्ति प्रति माह ₹1-3 प्रति किलोग्राम की दर से 5 किलो खाद्यान्न प्रदान करती है।

महत्वपूर्ण मुद्दे:

  • सूचकांक में NFSA के तहत अन्य मंत्रालयों और विभागों द्वारा कार्यान्वित कार्यक्रमों और योजनाओं को शामिल नहीं किया गया है।
  • सूचकांक केवल टीपीडीएस संचालन की दक्षता को दर्शाता है, यह किसी विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भूख, यदि कोई हो या कुपोषण, या दोनों, के स्तर को नहीं दर्शाता है।
  • सूचकांक NFSA और TPDS सुधारों पर केंद्रित है, जिन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मानकीकृत किया जा सकता है।

इंस्टा लिंक्स:

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम

अभ्यास प्रश्न:

भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए वास्तविक चुनौती अनाज उत्पादन की कमी के बजाय खराब अनाज प्रबंधन है। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

जाति जनगणना: संविधान एवं जनसंख्या की जातिगत गणना करने हेतु राज्यों की शक्ति

संदर्भ:

कई राजनीतिक दल सामाजिक रूप से आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों और ओबीसी की गणना के लिए राष्ट्रव्यापी ‘जाति जनगणना’ (Caste Census) कराए जाने पर जोर दे रहे हैं।

  • जाति-आधारित दलों का तर्क है, कि यद्यपि मंडल आयोग के अनुमान के अनुसार- देश में ओबीसी जनसंख्या 52% है, किंतु विश्वसनीय आंकड़ों के अभाव में पिछड़े वर्ग, उनके लिए चलायी जा रही कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से वंचित हो रहे हैं।
  • भारत में दशकीय जनगणना, भारत के जनगणना आयुक्त द्वारा ‘भारत की जनगणना अधिनियम’, 1948 के तहत आयोजित की जाती है।

Current Affairs

 

प्रमुख बिंदु:

  • राज्य के पास ‘जनगणना’ करने का अधिकार नहीं है।
  • राज्य, कल्याणकारी योजनाओं या अन्य उद्देश्यों के कार्यान्वयन के लिए जनसंख्या संबंधी आंकड़े या निवासियों के संख्या एकत्र कर सकते हैं।
  • राज्य यह कार्रवाई या तो मौजूदा राज्य कानून और नियमों के तहत कर सकते हैं या राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची III (समवर्ती सूची) की प्रविष्टि 45 के तहत नया कानून बनाया जा सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा 2017 में की गयी सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना का उपयोग करने की सिफारिशों को स्वीकार का लिया गया है:

  • यह लाभार्थियों की पहचान करने और सामाजिक योजनाओं के लिए धन के हस्तांतरण में मदद करेगा।
  • इसका उद्देश्य जाति समूहों के अनदेखे पहलुओं और संसाधनों में उनके हिस्से को सामने लाना है।

ओबीसी समूहों का उप-वर्गीकरण:

(Sub-categorisation of OBCs)

केंद्र सरकार के तहत अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को नौकरियों और शिक्षा में 27% आरक्षण दिया जाता है।

  • आरक्षण के लिए ओबीसी के भीतर उप-वर्गीकरण या श्रेणियां बनाने का तर्क यह है कि यह सभी ओबीसी समुदायों के बीच प्रतिनिधित्व का “समान वितरण” सुनिश्चित करेगा।
  • इसके लिए 2 अक्टूबर, 2017 को ‘रोहिणी आयोग’ का गठन किया गया था।
  • रोहिणी आयोग के गठन से पहले, केंद्र ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा दिया था।

रोहिणी आयोग के विचारार्थ विषय:

  • केंद्रीय सूची में शामिल ऐसे वर्गों के संदर्भ में, ओबीसी की व्यापक श्रेणी में शामिल जातियों या समुदायों के बीच आरक्षण के लाभों के असमान वितरण की सीमा की जांच करना।
  • ऐसे ओबीसी के भीतर उप-वर्गीकरण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण में तंत्र, मानदंड और पैरामीटर तैयार करना।
  • ओबीसी की केंद्रीय सूची में संबंधित जातियों या समुदायों या उप-जातियों या समानार्थक शब्दों की पहचान करने और उन्हें उनकी संबंधित उप-श्रेणियों में वर्गीकृत करने की कवायद शुरू करना।
  • ओबीसी की केंद्रीय सूची में विभिन्न प्रविष्टियों का अध्ययन करना और किसी भी दोहराव, अस्पष्टता, विसंगतियों और वर्तनी या प्रतिलेखन की त्रुटियों के सुधार की सिफारिश करना।

इंस्टा लिंक्स:

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग

अभ्यास प्रश्न:

अधिक समावेशी और सकारात्मक कार्रवाई के लिए भारत में पिछड़े वर्गों के उप-वर्गीकरण की आवश्यकता है। चर्चा कीजिए। (10 अंक)

स्रोत: न्यू इंडियन एक्सप्रेस, इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

क्रिप्टो-परिसंपत्तियों में बाजार


संदर्भ:

हाल ही में, क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने के लिए यूरोपीय संघ की संसद ने ‘क्रिप्टो-परिसंपत्तियों में बाजार’ (Markets in Crypto-Assets – MiCA) नामक एक एक नए कानून पर सहमति व्यक्त की है।

हालिया मुद्दे: हाल ही में, ‘टेराफॉर्म लैब्स’ के ‘लूना टोकन’ के क्रेश होने के बाद ‘स्टैबलकॉइन’ (Stablecoins) सवालों के घेरे में आ गया है।

MiCA के बारे में:

  • मार्केट्स इन क्रिप्टो एसेट्स (MiCA), मनी लॉन्ड्रिंग, उपभोक्ताओं और निवेशकों की सुरक्षा, क्रिप्टो फर्मों की जवाबदेही, स्थिर मुद्रा और क्रिप्टो खनन के पर्यावरण पदचिह्न जैसी चिंताओं को दूर करने का प्रयास करता है।
  • इसके तहत ‘अपूरणीय टोकन’ (Non-Fungible Tokens – NFT) को शामिल नहीं किया गया है।

प्रमुख प्रावधान:

  • न्यूनतम चलनिधि (Minimum Liquidity): MiCA ‘स्टैबलकॉइन’ जैसी मुद्राओं के जारीकर्ताओं को, उपयोगकर्ताओं द्वारा अचानक बड़ी निकासी प्रदान करने के लिए ‘न्यूनतम चलनिधि’ बनाए रखने के लिए अनिवार्य करेगा, और रिज़र्व को दिवालियेपन से भी सुरक्षित किया जाना चाहिए।
  • पर्यवेक्षण (Supervision): यूरोपीय  बैंकिंग  प्राधिकरण (European Banking Authority – EBA) को ‘स्टैबलकॉइन’ की निगरानी के लिए लाया गया है, और इसके साथ ही MiCA कानून में, ‘स्टैबलकॉइन’ जारीकर्ताओं को निवेशकों के लिए निःशुल्क  रूप से क्लेम देने के लिए अनिवार्य किया गया है।
  • कैपिंग: भुगतान साधन के रूप में उपयोग किए जाने वाले बड़े सिक्के प्रति दिन €200 मिलियन मूल्य के लेनदेन पर सीमित होंगे।
  • सार्वजनिक रजिस्टर: MiCA को गैर-अनुपालन ‘क्रिप्टो संपत्ति सेवा प्रदाताओं’ (CASPs) के सार्वजनिक रजिस्टर को बनाए रखने के लिए EBA की आवश्यकता होगी।
  • पर्यावरण पदचिह्न (Environmental footprint) घोषित करने की अनिवार्यतः MiCA के तहत, क्रिप्टो कंपनियों को अपने पर्यावरण और जलवायु पदचिह्न घोषित करना अनिवार्य होगा।

भारतीय विनियमन:

  • करों के माध्यम से: भारत ने अप्रैल से क्रिप्टो के अंतरण से होने वाली आय पर 30% कर लगाया और 1 जुलाई से स्रोत पर 1% कर कटौती जोड़ी।
  • प्रतीक्षा करें और देखें: भारतीय नियामकों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे ठोस निर्णय लेने से पहले अमेरिका में विकसित किए जा रहे नियमों पर विचार करें।

इंस्टा लिंक

मूल बातें: क्रिप्टोकरेंसी

अभ्यास प्रश्न:

क्रिप्टोकरेंसी क्या है? भारत में क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक स्पष्ट, रचनात्मक और अनुकूली नियामक वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। (15 अंक)

स्रोत: लाइव मिंट

 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

ग्लोबल फाइंडेक्स डेटाबेस 2021

संदर्भ:

हाल ही में, विश्व बैंक ने ‘ग्लोबल फाइंडेक्स डेटाबेस’ 2021 (Global Findex database 2021) जारी किया है। ‘ग्लोबल फाइंडेक्स डेटाबेस’ में इस विषय पर सर्वेक्षण किया गया है, कि 123 अर्थव्यवस्थाओं में लोग औपचारिक और अनौपचारिक वित्तीय सेवाओं जैसे कार्ड, एटीएम, मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग किस प्रकार करते हैं।

वैश्विक विशिष्ट निष्कर्ष:

  • खाता स्वामित्व (Account ownership): वैश्विक स्तर पर, 2021 में, 76 प्रतिशत वयस्कों का बैंक या विनियमित संस्थान जैसे क्रेडिट यूनियन, माइक्रोफाइनेंस संस्थान, या मोबाइल मनी सेवा प्रदाता में खाता था।
  • महिला सशक्तिकरण: मोबाइल धनराशि, वित्तीय समावेशन का – विशेष रूप से महिलाओं के लिए, उदाहरणार्थ उप-सहारा अफ्रीका में – एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है।
  • उच्च वित्तीय तनाव (High financial stress): खाता स्वामित्व और उपयोग में आशाजनक वृद्धि के बावजूद, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में लगभग आधे वयस्क ‘वित्तीय तनाव’ के कम से कम एक क्षेत्र, जैसेकि- स्वास्थ्य हेतु एक आपातकालीन निधि के बारे में चिंतित रहते हैं।
  • कम वित्तीय साक्षरता: लगभग दो-तिहाई बिना बैंक वाले वयस्कों ने कहा, कि यदि उन्होंने किसी वित्तीय संस्थान में खाता (मोबाइल धन को छोड़कर) खोला है, तो वे बिना सहायता के इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं।

भारत-विशिष्ट निष्कर्ष:

  • भारत में औपचारिक बैंकिंग तक ‘कम पहुंच’ और ‘विश्वास’ की कमी है।
  • आधार-संख्या ने लगभग 80% वयस्कों (2011 में 35%) को अपना खाता खोलने में योगदान दिया है।
  • ‘ड्रॉप-इन धोखाधड़ी’ और रिसाव: नकदी से बायोमेट्रिक स्मार्ट कार्ड में परिवर्तन होने से ‘पेंशन भुगतान’ में रिसाव (leakage) में 47% की कमी आई है।

Current Affairs

 

वित्तीय समावेशन:

वित्तीय समावेशन (Financial inclusion) का अर्थ है, कि व्यक्तियों और व्यवसायों के पास उपयोगी और किफायती वित्तीय उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच है, जो उनकी जरूरतों- लेनदेन, भुगतान, बचत, क्रेडिट और बीमा- को पूरा करते हैं, और एक जिम्मेदार और संधारणीय तरीके से वितरित करते हैं।

  • ‘वित्तीय समावेशन’ को 17 सतत विकास लक्ष्यों में से 7 के लिए सक्षम-कर्ता के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • विश्व बैंक समूह, अत्यधिक गरीबी को कम करने और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय समावेशन को एक महत्वपूर्ण सहायक मानता है।

इंस्टा लिंक:

वित्तीय समावेशन को किस प्रकार बढ़ावा दिया जा सकता है?

अभ्यास प्रश्न:

वित्तीय समावेशन को विश्व भर में आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के प्रमुख चालक के रूप में तेजी से पहचाना जा रहा है। इस दिशा में भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

स्रोत: विश्व बैंक

 


सामान्य अध्ययनIV


 

विषय: नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि

सुप्रसिद्ध व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों की जिम्मेदारी


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority – CCPA) ने ‘भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के समर्थन, 2022’ के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं।

  • तत्काल प्रभाव से लाए गए ये दिशानिर्देश सभी प्रकार के विज्ञापनों पर लागू होंगे।
  • टेलीविज़न ऑडियंस मेजरमेंट (TAM) मीडिया रिसर्च के एक प्रभाग- AdEx India द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020 की तुलना में 2021 में ‘सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट’ (Celebrity Endorsements) अर्थात मशहूर हस्तियों द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों में 44% की वृद्धि देखी गई।
  • सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट: किसी ब्रांड की सेल्स और/या रिकॉल वैल्यू बढ़ाने के लिए ‘सेलेब्रिटीज’ (मशहूर हस्तियों) का इस्तेमाल ‘सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट’ कहलाता है।

मशहूर हस्तियों को क्यों काम पर रखा जाता है?

  • ‘ब्रांड एंडोर्सर्स’ (Brand endorsers), सेलिब्रिटी के प्रभाव और/या दर्शकों के साथ इनके संबंधों के कारण खरीदारों के खरीदारी निर्णयों को प्रभावित करते हैं।
  • अनुद्योगी मार्केटिंग (Lazy marketing): जब ब्रांड एंडोर्सर्स के पास कोई आइडिया नहीं होता है, तो वे सिर्फ मशहूर हस्तियों को हायर करते हैं क्योंकि खरीदार उनसे आसानी से प्रभावित हो जाते हैं।
  • बिक्री बढ़ाने के लिए।

सेलिब्रिटी विज्ञापन के अनैतिक पहलू

प्रामाणिकता (Authenticity): जब मशहूर हस्तियाँ खुद जिन उत्पादों का उपयोग नहीं करती हैं, और उन उत्पादों का इन हस्तियों द्वारा विज्ञापन करना अनैतिक लग सकता है। इसके अलावा, यह पता लगाना काफी जटिल है कि कोई ‘सेलिब्रिटी’ उस उत्पाद का एक सामान्य उपयोगकर्ता है अथवा नहीं।

उदाहरण: सनी देओल ‘लक्स कोज़ी अंडरगारमेंट्स’ का विज्ञापन कर रहे हैं या सलमान खान लखानी चप्पलों का विज्ञापन कर रहे हैं।

मलिन छवि (Tarnished Image): सेलिब्रिटी विज्ञापन अनैतिक होते हैं, जब अपने जीवन में किसी भी विवाद में शामिल लोग किसी उत्पाद का विज्ञापन करते हैं तो यह ब्रांड पर उनकी नकारात्मक छवि को खराब तरीके से दर्शाता है।

जैसे, यौन शोषण के मामले में शामिल मलयालम अभिनेता दिलीप कई उत्पादों का विज्ञापन करते हैं।

असुरक्षित या अप्रभावी उत्पाद विज्ञापन: जब मशहूर हस्तियां कुछ ऐसे उत्पादों का विज्ञापन करती हैं जो समाज के लिए खतरनाक हैं, तब इसका अनैतिक पहलू यह है कि, ऐसे विज्ञापन इन उत्पादों का मार्ग प्रशस्त करता है।

जैसेकि- अजय देवगन द्वारा तंबाकू उत्पादों (विमल) का प्रचार।

अवांछित उत्पादों को खरीदने के लिए मजबूर करना: ऐसी संभावनाएं होती हैं जहां मशहूर हस्तियां अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं के आवेगपूर्ण खरीदारी व्यवहार को प्रेरित करती हैं जिसके परिणामस्वरूप अनावश्यक/हानिकारक उत्पादों की खरीद होती है।

जैसेकि–  शाहरुख खान ने पेप्सी का विज्ञापन (टैगलाइन- ये दिल मांगे मोर) किया।

भ्रामक जानकारी: जब मशहूर हस्तियां कुछ भ्रामक/झूठे दावे करती हैं तो विज्ञापन में नैतिकता की कमी होती है।

जैसेकि– फेयर एंड लवली को कई मशहूर हस्तियों द्वारा त्वचा को गोरा करने वाली क्रीम के रूप में प्रचारित किया जाता है।

हितों का टकराव: जब कोई विशेष विज्ञापन सेलिब्रिटी की छवि, सिद्धांतों, रुचियों आदि के प्रतिकूल होता  है, और सेलिब्रिटी पूरी तरह से ‘पैसों को ध्यान में रखने वाले होते हैं’ और तब इसके नैतिक निहितार्थ बहुत गंभीर हो सकते हैं।

जैसेकि- अक्षय कुमार ने तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन किया और बाद में इसके लिए उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा क्योंकि निजी जीवन में वह उनके खिलाफ थे।

विशेषज्ञों की राय की अवहेलना: जब किसी सेलिब्रिटी का विज्ञापन, विशेषज्ञ की राय से आगे निकल जाता है, तब यह विशेष रूप से अनैतिक होता है।

जैसे, बॉलीवुड हस्तियां हालिया ‘नुपुर शर्मा मामले’ पर न्यायाधीश की टिप्पणी की आलोचना कर रही हैं।


मुख्य परीक्षा संवर्धन हेतु पाठ्य सामग्री (नैतिकता/निबंध)


नुपी कीथेल: द मदर्स मूवमेंट ऑफ मणिपुर

मणिपुर में नुपी कीथेल (Nupi Keithel) को ‘इमा मार्केट’ (Ima Market) के नाम से जाना जाता है। यह 500 साल पुराना बाजार है, जिसमे 5000 से अधिक व्यापारी- सभी महिलायें- कारोबार करती हैं। मणिपुर के इतिहास का एक अनूठा प्रतीक, ‘इमा कीथेल’ (जिसका अनुवाद ‘माँ के बाजार’ में होता है) को एशिया और संभवतः दुनिया में सबसे बड़ा महिला बाजार माना जाता है।

महिलाओं के स्थान पर ‘इमा’ (माँ) का प्रयोग महत्वपूर्ण है और अकारण नहीं है; यह दर्शाता है कि यहां महिला विक्रेता सभी विवाहित हैं, या अपने जीवन में एक बिंदु पर विवाहित रही हैं। यहां महिलाएं खुद को संगठित कर सकती हैं और आर्थिक, राजनीतिक या सामाजिक संकट के समय में एकजुट हो सकती हैं।

Current Affairs

सर सैयद अहमद खान – धार्मिक सद्भाव पर इनके विचार

19वीं और 20वीं सदी के भारत में ईशनिंदा (Blasphemy) का कंटकमय मुद्दा बार-बार सामने आ रहा था और सर सैयद अहमद खान और मौलाना आजाद- दोनों विपरीत राजनीतिक विचारधाराओं के जाने-माने समर्थक थे- दोनों ने धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने की कोशिश की।

  • सर सैयद के अनुसार, ईशनिंदा के लिए हिंसक और जोरदार विरोध की आवश्यकता नहीं है और इसके लिए किसी तर्कसंगत जवाब की भी आवश्यकता नहीं है। इसका मतलब है, कि कोई किताबों का किताबों से जवाब देता है, शब्दों का शब्दों से जवाब देता है। किताबों पर प्रतिबंध लगाना या जलाना कोई समाधान नहीं है (“किताब का जवाब किताब है किताब जलाना नहीं”)।
  • किसी को भी इस मुद्दे को खुद सुलझाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अन्य धर्मों की निंदा या तिरस्कार करने के उद्देश्य से किसी भी चीज़ को मार्ग नहीं देना चाहिए; सरकार को कड़े कानून बनाने चाहिए।

x`प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारत में खिलौने

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में खिलौनों के आयात में 70% की कमी आई है। खिलौना उद्योग मुख्य रूप से भारत में एक असंगठित उद्योग है।

सरकार की पहल:

  • “भारतीय टॉय स्टोरी की रीब्रांडिंग” पर प्रधानमंत्री का आह्वान।
  • टॉयकैथॉन 2021 का आयोजन: शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय सभ्यता पर आधारित खिलौनों/खेलों की अवधारणा के लिए किया गया था।
  • स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘भारतीय टॉय स्टोरी’ के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छठी कक्षा से छात्रों के लिए खिलौना बनाना शुरू किया जाएगा।
  • छूट: पंजीकृत स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित और बेची जाने वाली वस्तुओं और वस्तुओं के मानकीकरण पर छूट है।

लकड़ी के खिलौने (उत्तरप्रदेश):

वाराणसी के लकड़ी के खिलौनों का इतिहास 200 साल से भी पुराना है।

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मिट्टी के खिलाड़ी (राजस्थान)

एटिकोप्पका बोम्मलु (आंध्र प्रदेश):

खिलौनों के पारंपरिक आकार में ‘नगाली’ के साथ एक किसान, एक दुल्हन का सेट, वीणा, सन्नई मेलम, पारंपरिक शादी की मिठाइयों का प्रसार और बहुत कुछ शामिल हैं।

चोप्पू समान (तमिलनाडु): छोटे रसोई के बर्तनों के ये लकड़ी के खिलौने के सेट विभिन्न आकारों और आकारों में आते हैं, किनारों पर पॉलिश किए जाते हैं और चमकीले रंग से रंगे जाते हैं।

चन्नपटना खिलौने (कर्नाटक): चन्नापटना खिलौने प्राकृतिक उत्पादों जैसे लकड़ी और प्राकृतिक वनस्पति रंगों से बनाए जाते हैं।

चनकाना, घुग्गू और हंदवई (पंजाब):

पांच समुदायों के लिए ‘मूल निवासी’ का दर्जा

असम सरकार ने पांच असमिया मुस्लिम उप-समूहों- गोरिया, मोरिया, जोल्हा, देशी और सैयद उप-समूहों को ‘मूल निवासी’ असमिया मुस्लिम समुदायों (Indigenous Assamese Muslim Communities) का दर्जा प्रदान किया है।

महत्व:

  • लंबे समय से चली आ रही मांग: असमिया भाषी मुस्लिम समुदायों का ‘मूल निवासी’ (Indigenous) दर्जा स्थिति उन्हें बंगाली भाषी मुसलमानों से अलग करेगा, जो पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से असम में आकर बस गए थे।
  • बेहतर लाभ: इस कदम से स्वास्थ्य, सांस्कृतिक पहचान, शिक्षा, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण में उनका विकास सुनिश्चित होगा।

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वल्बाचिया बैक्टीरिया

ICMR के ‘वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर’ (VCRC) के वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय से ‘वल्बाचिया बैक्टीरिया’ (Wolbachia bacteria) के वाहक मच्छरों के साथ स्थानीय ‘एडीज एजिप्टी’ मच्छरों (जो डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस को प्रसारित करते हैं) को क्रॉस-ब्रेड किया है।

वल्बाचिया बैक्टीरिया के बारे में:

वल्बाचिया बैक्टीरिया, हानिकारक विषाणुओं के प्रसार को रोकता है लेकिन स्वयं मच्छरों को नुकसान नहीं पहुंचाता है।

  • वल्बाचिया (Wolbachia) एक बग है जो प्राकृतिक रूप से 60% कीड़ों में पाया जाता है। लेकिन एडीज मच्छर में इस बग की आवृत्ति बहुत कम होती है।
  • वल्बाचिया, मादा मच्छरों से इनकी संतति में फैलता है और धीरे-धीरे पूरी आबादी में फैल जाता है। मच्छरों में मौजूद होने पर ‘वल्बाचिया’ डेंगू वायरस के प्रसार को रोकता है।

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फिशबोन चैनल वृक्षारोपण विधि

आंध्र प्रदेश में कृष्णा वन्यजीव अभयारण्य में मैंग्रोव को पुनर्जीवित करने के लिए ‘फिशबोन चैनल प्लांटेशन विधि’ (fishbone channel plantation method) का उपयोग किया गया है।

  • खाड़ी क्षेत्र के पानी को ‘मछली की हड्डी’ के आकार के चैनलों के माध्यम से मैंग्रोव वनों की ओर मोड़ा जा रहा है, ताकि लवणीय बंजर भूमि, रोपे गयी मैंग्रोव प्रजातियों को सहारा देने के लिए उपजाऊ बन जाए। फिशबोन आकार पानी को क्षेत्र के हर नुक्कड़ तक पहुचाने में सहायक होता है।
  • इस तकनीक का उपयोग उन क्षेत्रों को कृत्रिम रूप से जलमग्न करने के लिए किया जाता है जहां नियमित रूप से ज्वार-भाटा नहीं आता है।
  • अंतर्ज्वारीय क्षेत्रों के पास सूखे हुए आर्द्रभूमि में इस विधि से, नए मैंग्रोवों को फिर से हराभरा किया जा सकता है।

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