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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 5 July 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. प्रत्यक्ष पोषण हस्तक्षेप

सामान्य अध्ययन-III

  1. उद्यम और सेवा केंद्रों का विकास
  2. प्लास्टिक के विकल्प पर नीति आयोग की रिपोर्ट
  3. लार्ज हैड्रान कोलाइडर

सामान्य अध्ययन-IV

  1. सिविल सेवाओं के लिए सरदार पटेल का दृष्टिकोण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. नए संसद भवन से संबंधित परियोजना के लिए तमिलनाडु द्वारा मिट्टी के नमूने भेजे गए
  2. TiHAN
  3. डोनेट्स्क और लुहान्स्क
  4. स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए गुजरात, कर्नाटक और मेघालय सर्वश्रेष्ठ राज्य: DPIIT रैंकिंग
  5. चेनकुरिंजी (Chenkurinji) को जलवायु परिवर्तन से बचाने की आवश्यकता

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

भारत में प्रत्यक्ष पोषण हस्तक्षेपों को बढाए जाने की आवश्यकता


संदर्भ:

वर्ष 2015-16 के चौथे ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ (National Family Health Survey – 4) या NFHS-4 की तुलना में वर्ष 2019-21 के पांचवें ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ अर्थात NFHS -5 के डेटा से पता चलता है कि महिला सशक्तिकरण के कई प्रतिनिधि संकेतकों में चार से पांच साल की अवधि में पर्याप्त सुधार हुआ है।

  • भारत, सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से प्रभावित है, जैसे कि ‘बाल कुपोषण’ (5% अविकसित, 67.1% रक्ताल्पता)। ‘बाल कुपोषण’ के कारण भारत में पांच वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों की मृत्यु दर 68.2% है।
  • नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD)
  • ‘महिला एवं बाल विकास मंत्रालय’ जीवन के पहले 1,000 दिनों (गर्भावस्था के 270 दिन और 730 दिन; 24 महीने) के “अवसर की खिड़की” (window of opportunity) पर मिलकर काम करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों को एक साथ लाता है।

पोषण संबंधी ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ डेटा (NFHS-5  बनाम NFHS-4):

प्रगतिशील कारक (Progressive factors):

  • प्रसवपूर्व सेवा में उपस्थिति में पर्याप्त वृद्धि हुई है (6 से 70.0%)।
  • महिलाओं का अपना बचत बैंक खाता (0 से 78.6%)।
  • जिन महिलाओं के पास मोबाइल फोन हैं और वे स्वयं इसका उपयोग करती हैं (9% से 54.0%)।
  • 18 साल की उम्र से पहले की विवाहित महिलाएं (8% से 23.3%)।
  • 10 या उससे अधिक वर्षों की स्कूली शिक्षा वाली महिलाएं (7% से 41.0%)।
  • खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन तक पहुंच (8% से 68.6%)।

प्रतिगामी कारक (Regressive factors):

  • देश ने ‘प्रत्यक्ष पोषण हस्तक्षेपों’ (Direct Nutrition Interventions) के मामले में अच्छी प्रगति नहीं की है।
  • गर्भधारण पूर्व पोषण, मातृ पोषण और उचित शिशु और बाल आहार पर प्रभावी ढंग से ध्यान दिया जाना बाकी है।
  • भारत में, शिशु के जन्म के बाद पहले छह महीनों में- जब केवल स्तनपान ही एकमात्र अनिवार्य पोषण होता है- भी 20% से 30% तक अल्पपोषण होता है।
  • न तो ‘मातृ पोषण देखभाल’ हस्तक्षेप ने और न ही शिशुओं और छोटे बालकों के लिए आहार पद्धतियों आहार प्रथाओं ने वांछित सुधार दिखाया है।
  • विशिष्ट स्तनपान (Exclusive Breastfeeding – EBF) की प्रक्रिया में मात्र मामूली सुधार हुआ है।

खराब पोषण का दुष्चक्र: खराब पोषण न केवल स्वास्थ्य और उत्तरजीविता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, बल्कि सीखने की क्षमता और स्कूल के प्रदर्शन को भी कम करता है, और वयस्क अवस्था में, इसका अर्थ कम आय और मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी पुरानी बीमारियों के जोखिम में वृद्धि में तब्दील हो जाता है।

Current Affairs

आवश्यकता:

  • पहले 1000 दिनों का हस्तक्षेप: जीवन के पहले 1,000 दिनों में गर्भधारण से पहले पोषण, मातृ पोषण और बच्चे को खिलाने की पद्दतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • प्रसव से पहले प्रसवपूर्व जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं को सुनियोजित रूप से स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है और बाद में बार-बार घर जाने से काफी फर्क पड़ता है।
  • विशेष स्तनपान के बारे में जागरूकता पैदा करना।
  • पूरक आहार पद्धतियाँ, यानी छह महीने के बाद से स्तन के दूध की निरंतरता के साथ अर्ध-ठोस आहार का पूरक पोषण।

कुपोषण से निपटने के लिए सरकारी योजनाएं:

  • एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
  • मध्याह्न भोजन योजना
  • मनरेगा
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन

‘पोषण अभियान’ के बारे में:

पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) को ‘राष्ट्रीय पोषण मिशन’ भी कहा जाता है। इस अभियान को 8 मार्च 2018 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देशभर में कुपोषण की समस्या को संबोधित करने हेतु ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर शुरू किया गया था।

  • कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है।
  • अभियान का लक्ष्य नाटेपन, अल्पपोषण और रक्ताल्पता (छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोर लड़कियों के बीच) को कम करना और ‘जन्म के समय कम वजन’ (low birth weight) को क्रमशः 2%, 2%, 3% और 2% प्रति वर्ष कम करना है।
  • इसका एक अन्य लक्ष्य वर्ष 2022 तक 0-6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों में नाटेपन को 4% से 25% तक कम करने का भी है।

इस अभियान के तहत, ‘उच्च प्रभाव आवश्यक पोषण-संवेदनशील हस्तक्षेप’-  जो अप्रत्यक्ष रूप से मां, शिशु और छोटे बच्चे के पोषण को प्रभावित करते हैं (उदाहरण के लिए, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के कवरेज में सुधार, उपलब्धता, और बेहतर पानी, स्वच्छता, विविध आहार और स्वच्छता तक पहुंच)-  पर विशेष जोर दिया जाता है।

इंस्टा लिंक्स:

आईसीडीएस

मध्याह्न भोजन योजना

अभ्यास प्रश्न:

जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण महत्वपूर्ण है। चर्चा कीजिए। (यूपीएससी 2019)

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

 उद्यम एवं सेवा केंद्रों का विकास

संदर्भ:

सरकार द्वारा ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (special economic zones – SEZ) कानून में व्यापक सुधार करने के लिए ‘उद्यम एवं सेवा केंद्रों का विकास’ (Development of Enterprise and Service Hubs – DESH) विधेयक को पेश करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

‘उद्यम एवं सेवा केंद्रों का विकास’ (DESH) के रूप में DESH अधिनियम, वर्तमान SEZ अधिनियम 2005 की जगह लेगा।

मौजूदा SEZ अधिनियम में परिवर्तन की आवश्यकता:

  • विश्व व्यापार संघठन (WTO) की ‘विवाद निपटान समिति’ ने फैसला सुनाते हुए कहा है, कि ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (SEZ) योजना सहित भारत की निर्यात संबंधी योजनाएं निर्यात को सीधे कर लाभ से जोडती है, अतः ये सभी योजनाएं WTO के नियमों से असंगत हैं।
  • WTO नियमों के अनुसार- देशों को निर्यात पर सीधे सब्सिडी देने की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह बाजार की कीमतों को विरूपित कर सकता है।

SEZ अब इतना लोकप्रिय क्यों नहीं है?

  • MAT और सूर्यास्त अनुच्छेद: न्यूनतम वैकल्पिक कर (Minimum Alternate Tax – MAT) और टैक्स छूट को समाप्त करने हेतु एक ‘सूर्यास्त अनुच्छेद’ (Sunset Clause) लागू होने के बाद SEZ ने अपना आकर्षण खोना शुरू कर दिया।
  • SEZ इकाइयों को पहले पांच वर्षों के लिए निर्यात आय पर 100% आयकर छूट, अगले पांच वर्षों के लिए 50%, और अगले पांच वर्षों के लिए 50% फिर से ‘निर्यात लाभ’ का फायदा मिलता था।

DESH क़ानून किस प्रकार भिन्न है?

  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना: DESH कानून की व्यापकता निर्यात को बढ़ावा देने से कहीं अधिक है और इसका व्यापक उद्देश्य ‘विकास केंद्रों’ के माध्यम से घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है।
  • इन केंद्रों (हबों) को, SEZ व्यवस्था में निर्धारित ‘अनिवार्य पांच वर्षों में संचयी रूप से ‘शुद्ध विदेशी मुद्रा’ सकारात्मक (अर्थात, आयात से अधिक निर्यात) होना’ आवश्यक नहीं होगा, और घरेलू क्षेत्र में अधिक आसानी से बेचने की अनुमति दी जाएगी।
  • इसलिए, ये केंद्र ‘विश्व व्यापार संगठन’ के नियमों के अनुरूप होंगे।
  • सिंगल विंडो पोर्टल: DESH कानून में ‘हब’ की स्थापना और संचालन के लिए समयबद्ध अनुमोदन प्रदान करने हेतु एक ऑनलाइन सिंगल-विंडो पोर्टल का प्रावधान भी किया गया है।

क्या घरेलू बाजार में उत्पादों को बेचना आसान होगा?

  • हाँ। कंपनियां उत्पादों को घरेलू बाजार में केवल अंतिम उत्पाद के बजाय ‘आयातित इनपुट’ और ‘कच्चे माल पर भुगतान किए जाने वाले शुल्क’ के साथ बेच सकती हैं।
  • मौजूदा SEZ व्यवस्था में, जब कोई उत्पाद घरेलू बाजार में बेचा जाता है तो अंतिम उत्पाद पर शुल्क का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा, SEZ के विपरीत, DESH क़ानून के तहत विदेशी मुद्रा में कोई अनिवार्य भुगतान आवश्यक नहीं होगा।
  • समकारी लेवी (Equalization Levy): विधेयक के अनुसार, सरकार घरेलू बाजार में आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं या सेवाओं पर एक ‘समकारी लेवी’ लगा सकती है, ताकि ‘कर’ को बाहर की इकाइयों द्वारा प्रदान किए गए करों के बराबर लाया जा सके।

DESH में राज्यों की भूमिका:

  • राज्यों के लिए बड़ी भूमिका: SEZ DESH में, केंद्र के वाणिज्य विभाग द्वारा अधिकांश निर्णय लिए गए थे। अब, राज्य भी निर्णय-प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे और यहां तक ​​कि विकास केंद्रों के लिए सीधे अनुमोदन के लिए केंद्रीय बोर्ड को सिफारिशें भेज सकेंगे।
  • केन्द्रों (HUBS) के कामकाज की निगरानी के लिए राज्य बोर्डों की स्थापना की जाएगी। राज्य बोर्डों के पास माल के आयात या खरीद को मंजूरी देने और विकास केंद्र में वस्तुओं या सेवाओं, वेयरहाउसिंग और व्यापार के उपयोग की निगरानी करने की शक्ति होगी।

Current Affairs

 

इंस्टा लिंक

 SEZ में सुधार

अभ्यास प्रश्न:

भारत की SEZ नीति की सामाजिक और आर्थिक लागतों का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। (250 शब्द)

स्रोत: लाइव मिंट

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

प्लास्टिक के विकल्प पर नीति आयोग की रिपोर्ट

संदर्भ: हाल ही में, नीति आयोग की एक रिपोर्ट में प्लास्टिक के विकल्प या प्लास्टिक को नष्ट करने योग्य बनाने वाली तकनीकों पर सुझाव दिया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

वस्तुस्थिति:

  • भारत में प्रति वर्ष 3.47 मिलियन टन प्लास्टिक अपशिष्ट का उत्पादन होता है, जिसमें से मात्र ही 60% पुनर्चक्रण के लिए एकत्र किया जाता है।
  • गोवा, दिल्ली और केरल में प्रति व्यक्ति सर्वाधिक प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हुआ है, जबकि नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में प्रति व्यक्ति सबसे कम प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ है।
  • विश्व स्तर पर, इनमें से 97-99% प्लास्टिक अपशिष्ट, जीवाश्म ईंधन फीडस्टॉक से प्राप्त होता हैं जबकि शेष 1-3% जैव (संयंत्र) आधारित प्लास्टिक से आता है।

सिफारिशें:

  • उभरती हुई तकनीकों का विकास: उदाहरण के लिए, योगज / ‘एडिटिव्स’ (additives), प्लास्टिक को पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीइथाइलीन जैसे बायोडिग्रेडेबल ‘पॉलीओलेफ़िन’ बना सकते हैं।
  • जैव-प्लास्टिक का उपयोग: प्लास्टिक के किफायती विकल्प के रूप में।
  • कचरे के पुनर्चक्रण में अनौपचारिक क्षेत्र और कमजोर समूहों के योगदान की सराहना की जानी चाहिए।
  • कचरे को कम करने के लिए ‘विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी’ का उपयोग किया जाए।
  • कम्पोस्टेबल और बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का समतलन और संग्रह।
  • पारदर्शिता: अपशिष्ट उत्पादन, संग्रह और निपटान पर डेटा का खुलासा किया जाए।
  • ग्रीनवाशिंग से बचें: ग्रीनवाशिंग (Greenwashing), कंपनी के उत्पाद पर्यावरण की दृष्टि से किस प्रकार बेहतर हैं, इस बारे में ‘भ्रामक जानकारी’ देने की प्रक्रिया होती है।

सर्वोत्तम पद्धतियाँ:

भारत:

  • अरुणाचल प्रदेश: एक जिले में प्लास्टिक बैंक स्थापित किए गए; परिवर्तनशील जिलों में सड़क निर्माण में प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया।
  • दिल्ली: पीडब्लूएम नियमों के उल्लंघन के लिए 88,00,000/- रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया।
  • तमिलनाडु: प्लास्टिक कचरे की संग्रह क्षमता 92% है।
  • सिक्किम: सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग शुरू।
  • उत्तराखंड: ऊर्जा संयंत्रों में प्लास्टिक कचरे को ईंधन, आरडीएफ और कचरे के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है।
  • बायोडिग्रेडेबल कटलरी: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) लैब डीएफआरएल ने बायोडिग्रेडेबल कटलरी के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है।

विश्व:

  • इंडोनेशिया में खाद्य-योग्य समुद्री शैवाल निर्मित कप (Edible Seaweed Cups): समुद्री शैवाल भूमि आधारित पौधों की तुलना में 60 गुना तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे यह एक महत्वपूर्ण कार्बन सिंक बन जाता है।
  • शैवाल-मिश्रित एथिलीन-विनाइल एसीटेट: एक अमेरिका-आधारित फर्म ने शैवाल-मिश्रित एथिलीन-विनाइल एसीटेट बनाया है जो वायु और जल प्रदूषण (अमोनिया, फॉस्फेट और कार्बन डाइऑक्साइड) को प्रोटीन से भरपूर ‘पादप बायोमास’ में बदल देता है।
  • शून्य प्लास्टिक पुनर्नवीनीकरण कागज की बोतल: ब्रिटेन की एक फर्म ने दुनिया में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध ‘शून्य प्लास्टिक पुनर्नवीनीकरण कागज’ (zero plastic recycled paper) की बोतल का आविष्कार किया है।
  • काष्ठ-आधारित कागज़ की पैकेजिंग (Wood-based paper packaging): 2020 में, स्कॉटलैंड की एक कागज़ बनाने वाली कंपनी ने प्लास्टिक की पैकेजिंग के लिए काष्ठ-आधारित एक स्थायी विकल्प विकसित किया है।
  • बायोट्रांसफॉर्मेशन प्रक्रिया: यूके स्थित एक कंपनी ने एक एडिटिव (additive) विकसित किया है, जिसे पॉलीओलेफिन्स के मास्टरबैच में जोड़ा जाता है।

पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक के प्रकार:

  • बायो-प्लास्टिक में ऐसी कई सामग्रियां शामिल हैं जो या तो जैव-स्रोत से उत्पन्न (बायो-सोर्स) या बायोडिग्रेडेबल या दोनों हैं और नवीकरणीय बायोमास संसाधनों- जो अक्सर कॉर्न स्टार्च/गन्ना/कसावा होती हैं- से निर्मित की गयी होती हैं। ऐसी सामग्रियां जैव-अपघट्य (बायोडिग्रेडेबल) हो सकती हैं या नहीं भी सकती हैं।
  • जैव-अपघट्य या बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का मतलब है कि कंपोस्टेबल प्लास्टिक के अलावा, प्लास्टिक, जो किसी भी माइक्रोप्लास्टिक, या दृश्यमान, अलग-अलग या जहरीले अवशेषों और प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव को छोड़े बिना, निर्दिष्ट समय अवधि में परिवेशी पर्यावरण (स्थलीय या पानी में) परिस्थितियों में जैविक प्रक्रियाओं द्वारा पूर्ण अपघटन से गुजरती है, और BIS के निर्धारित मानकों का पालन करती है तथा CPCB द्वारा प्रमाणित होती है।
  • कम्पोस्टेबल प्लास्टिक्स (Compostable plastics): कम्पोस्टेबल प्लास्टिक जैविक प्रक्रियाओं द्वारा कम्पोस्टिंग के दौरान CO2, पानी, अकार्बनिक यौगिकों और बायोमास उत्पन्न करने के लिए अपघटन से गुजरती है, और जहरीले अवशेष नहीं छोडती है। कम्पोस्टेबल प्लास्टिक संयंत्र आधारित तथा पेट्रोलियम आधारित दोनों प्रकार की हो सकती है।
  • BASF का इकोफ्लेक्स ‘कंपोस्टेबल पॉलीमर’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आंशिक रूप से पेट्रोलियम आधारित है, लेकिन औद्योगिक कंपोस्ट सुविधाओं में खाद का कार्य करती है।
  • ऑक्सो-डिग्रेडेबल (Oxo-degradable): ‘पालीईथीलीन प्लास्टिक’ (Polyethylene (PE) Plastic), जैसे पारंपरिक प्लास्टिक- जिसमें प्लास्टिक को छोटे टुकड़ों में टूटने में मदद करने के लिए एक योजक शामिल होता है, जिससे पर्यावरण में माइक्रोप्लास्टिक का रिसाव हो सकता है।

Current Affairs

 

सिंगल यूज प्लास्टिक:

  • 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित कर दी गयी है।
  • ‘एकल उपयोग प्लास्टिक’ / ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ (Single-Use Plastic), निपटान-योग्य (Disposable) प्लास्टिक का एक रूप होती है, जिसे केवल एक बार इस्तेमाल करके फेंक दिया जाता है, और जिसे किराने की थैलियों, खाद्य पैकेजिंग, बोतलों और स्ट्रॉ आदि की तरह पुनर्चक्रित किया जा सकता है।
  • केंद्र सरकार द्वारा इसे प्लास्टिक से बनी एक वस्तु के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका उद्देश्य निपटान या पुनर्चक्रण से पहले “केवल एक बार” उपयोग किया जाना है।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक की परिभाषा के अंतर्गत 21 वस्तुओं की एक सूची तैयार की गयी है, जिसमे प्लास्टिक स्टिक के साथ ईयरबड, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट के लिए थर्मोकोल, प्लेट, कप, ग्लास, कटलरी जैसे कांटे, चम्मच, चाकू, पुआल, ट्रे, रैपिंग या पैकेजिंग फिल्म, मिठाई बक्से, निमंत्रण कार्ड और सिगरेट के पैकेट, प्लास्टिक या पीवीसी बैनर 100 माइक्रोन से कम, स्टिरर आदि शामिल हैं।
  • इन वस्तुओं को पर्यावरण मंत्रालय द्वारा ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम’, 2021 के तहत सूचीबद्ध किया गया था।
  • उपरोक्त ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ वस्तुएं “कम उपयोगिता वाली और उच्च अपशिष्ट क्षमता वाली हैं।
  • प्लास्टिक पैकेजिंग कचरा, जोकि प्लास्टिक अपशिष्ट प्रदूषण की बहुत बड़ी समस्या में एक प्रमुख योगदानकर्ता है- अभी तक सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं को चरणबद्ध तरीके से बाहर करने के तहत कवर नहीं किया गया है।
  • मिनरल पानी की बोतलें या वायवीय पेय की प्लास्टिक की बोतलें भी इस प्रतिबंध से अप्रभावित हैं, हालांकि, आम धारणा में, इनको ‘प्लास्टिक प्रदूषण’ का प्रतिनिधि माना जाता है।

इंस्टा लिंक

अधिक जानकारी के लिए: सिंगल यूज प्लास्टिक

रक्त में प्लास्टिक

अभ्यास प्रश्न

  1. देश में प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा कीजिए। क्या आपको लगता है कि प्लास्टिक और प्लास्टिक प्रदूषण पर कानूनी रूप से ‘बाध्यकारी वैश्विक संधि’ आगे बढ़ने का रास्ता है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
  2. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियमों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम कैसे लागू किए जाएंगे? चर्चा कीजिए।

स्रोत: नीति आयोग

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

लार्ज हैड्रान कोलाइडर

संदर्भ:

विश्व का सबसे शक्तिशाली पार्टिकल कोलाइडर, लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (Large Hadron Collider – LHC), 5 जुलाई से ऊर्जा के अभूतपूर्व स्तर पर प्रोटॉनों का परस्पर टकराव कर देगा।

इससे “नई भौतिकी” – या ‘कण भौतिकी’ (Particle Physics) के मानक मॉडल से परे ‘भौतिकी’ के साक्ष्य प्राप्त होने की उम्मीद है। जिसके तहत, चार मौलिक बलों द्वारा शासित पदार्थ के ‘बुनियादी बिल्डिंग ब्लॉक्स’ आपस में किस प्रकार अंतःक्रिया करते हैं।

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर: परिचय

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC), सभी वस्तुओं के सबसे छोटे ज्ञात ‘बिल्डिंग ब्लॉक’ के कणों का अध्ययन करने के लिए निर्मित की गयी एक विशाल, जटिल मशीन है।

संरचना: LHC, जो स्विस-फ्रांसीसी सीमा पर 100 मीटर भूमिगत 27 किमी लंबा ‘ट्रैक-लूप’ है।

परिचालन: अपनी परिचालन अवस्था में, यह सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रोमैग्नेट्स की एक रिंग के अंदर विपरीत दिशाओं में प्रकाश की गति से लगभग दो प्रोटॉनों को फायर करता है।

चुंबकीय क्षेत्र द्वारा निर्देशित: सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रोमैग्नेट्स द्वारा निर्मित चुंबकीय क्षेत्र, प्रोटॉन को एक ‘संकीर्ण धारा’ (Tight Beam) में रखता है और ‘बीम पाइप’ के माध्यम से यात्रा करते समय प्रोटॉनों का मार्गदर्शन करता है और अंत में इनका परस्पर टकराव करवाता है।

उच्च परिशुद्धता: कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें टकराने का कार्य 10 किमी की दूरी पर दो सुइयों को इतनी सटीकता से दागने जैसा है कि वे आधे रास्ते में परस्पर मिल जायें।

सुपरकूल्ड: चूंकि LHC के शक्तिशाली विद्युत चुम्बक बिजली के बोल्ट जितना ही करंट ले जाते हैं, इसलिए इन्हें ठंडा रखा जाना होता है। इस मशीन में अपने महत्वपूर्ण घटकों को शून्य से 271.3 डिग्री सेल्सियस पर अल्ट्राकोल्ड रखने के लिए तरल हीलियम का उपयोग किया जाता है, जोकि ‘इंटरस्टेलर स्पेस’ की तुलना में अधिक ठंडा होता है।

प्रयोग:

  • एटलस (ATLAS), लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC), पर सबसे बड़ा ‘सामान्य-उद्देश्य कण डिटेक्टर’ प्रयोग (Experiment) है।
  • ‘कॉम्पैक्ट म्यूऑन सोलेनॉइड’ (Compact Muon Solenoid – CMS) प्रयोग इतिहास में सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोगों में से एक है। इसका लक्ष्य एटलस के समान है, लेकिन इसमें एक अलग चुंबक-प्रणाली डिजाइन का उपयोग किया जाता है।

नवीनतम अपग्रेड: इसके रखरखाव और उन्नयन के बाद, इस अप्रैल को कोलाइडर को वापस चालू कर दिया गया था। एलएचसी का तीसरा ‘रन’ है।

उपलब्धियां:

  • गॉड पार्टिकल’ की खोज: CERN के वैज्ञानिकों ने LHC के पहले ‘रन’ (प्रवाह) के दौरान ‘हिग्स बोसोन’ या ‘गॉड पार्टिकल’ की खोज की घोषणा की थी।
  • इसके कारण ‘पीटर हिग्स’ और उनके सहयोगी ‘फ्रांस्वा एंगलर्ट’ को 2013 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • ‘हिग्स बोसोन’, हिग्स फील्ड (Higgs field) से जुड़ा मौलिक कण है। हिग्स फील्ड एक ऐसा क्षेत्र जो अन्य मूलभूत कणों जैसे इलेक्ट्रॉनों और क्वार्क को द्रव्यमान प्रदान करता है।
  • मानक मॉडल से परे ‘नई भौतिकी’ (New Physics): हिग्स बोसोन की खोज के बाद, वैज्ञानिकों ने मानक मॉडल से परे देखने के लिए एक उपकरण के रूप में एकत्र किए गए डेटा का उपयोग करना शुरू कर दिया है, जो वर्तमान में ब्रह्मांड के सबसे प्राथमिक ‘बिल्डिंग ब्लॉक’ और इनकी परस्पर अंतःक्रिया का सबसे अच्छा सिद्धांत है।

नया अंवेषण: तथाकथित “डार्क मैटर” के बारे में जानकारी को आगे बढ़ाने के लिए: डार्क मैटर का पता लगाना मुश्किल है, और माना जाता है कि इसके कण ब्रह्मांड का अधिकांश हिस्सा बनाते हैं, किंतु चूंकि यह पूरी तरह से अदृश्य होते हैं क्योंकि यह न तो अवशोषित तथा परावर्तित होते हैं और न ही प्रकाश उत्सर्जित करते हैं।

 

 

 

इंस्टा लिंक:

मैटर- एंटीमैटर

अभ्यास प्रश्न

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) के मुख्य लक्ष्यों को सूचीबद्ध कीजिए। यह ब्रह्मांड के विकास को समझने में किस प्रकार हमारी मदद करेगा? (250 शब्द)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययनIV


 

विषय: नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि

सिविल सेवाओं के बारे में सरदार पटेल की परिकल्पना

संदर्भ:

दिल्ली के मेटकाफ हाउस में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने लोक सेवकों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश देते हुए उन्हें “भारत का स्टील फ्रेम” बताया था।

मूल्य, जो सिविल सेवकों के पास होने चाहिए:

  • एक सिविल सेवक को ‘एस्प्रिट डे कोर’ (esprit de corps) को विकसित करना चाहिए। इसका अर्थ है टीम या समूह के सदस्यों के बीच गर्व की साझा भावना रखना।
  • एक सिविल सेवक को ‘सेवा’ से संबंधित होना, अनुबंध- जिन अनुबंधों पर आप हस्ताक्षर करेंगे, और अपनी पूरी सेवा में इसकी गरिमा, अखंडता और अविनाशीता को बनाए रखने के लिए एक गौरवपूर्ण विशेषाधिकार के रूप में मानना ​​चाहिए।
  • जिम्मेदारी की किसी भी स्थिति में, सिविल सेवक को हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि समग्र रूप से भारत की भलाई में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान कैसे दिया जाए।
  • पटेल के अनुसार, एक सिविल सेवक सरकार पर भरोसा कर सकता है कि वह उसे संतुष्ट और खुश रखेगी, ताकि वह सरकार को अपना सर्वश्रेष्ठ दे सके, “लेकिन यदि आप (सिविल सेवक) इसे सेवा की शर्त बनाते हैं तो यह आपके अनुरूप नहीं होगा”।
  • पटेल ने सिविल सेवकों को सलाह दी कि वे प्रशासन की अधिकतम निष्पक्षता और अविनाशीता बनाए रखें।
  • “एक सिविल सेवक राजनीति में भाग नहीं ले सकता और न ही उसे भाग लेना चाहिए। न ही उन्हें खुद को सांप्रदायिक झगड़ों में शामिल करना चाहिए।“
  • पटेल का यह व्यापक संदेश, एक सिविल सेवक की आचार संहिता के संबंध में था।
  • सिविल सेवा का भविष्य सिविल सेवकों द्वारा निर्धारित नींव और परंपराओं, उनके चरित्र और क्षमताओं और उनकी सेवा की भावना पर निर्भर करेगा।
  • उन्हें विश्वास के साथ अपने भविष्य की ओर देखना चाहिए। यदि वे सेवा की सच्ची भावना से सेवा करते हैं, तो उन्हें सबसे अच्छा इनाम मिलेगा।

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प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


नए संसद भवन से संबंधित परियोजना के लिए तमिलनाडु द्वारा मिट्टी के नमूने भेजे गए

  • मिट्टी के ये नमूने, प्राचीन तमिल संगम साहित्य में वर्णित 5 पारिस्थितिक क्षेत्रों से संबंधित हैं।
  • प्राचीन तमिल संगम साहित्य में वर्णित पांच पारिस्थितिक क्षेत्रों से ‘मिट्टी के नमूने’ – कुरिंजी, मुलई, मरुथम, नीथल और पलाई – एकत्र किए गए हैं और हाल ही में ‘राजधानी दिल्ली’ को भेजे गए हैं।

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TiHAN

स्वायत्त नेविगेशन पर प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (Technology Innovation Hub on Autonomous Navigation – TiHAN) “एक बहु-विषयक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को भविष्य और अगली पीढ़ी की “स्मार्ट मोबिलिटी” तकनीक में एक वैश्विक भागीदार बनाना है।

  • इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘कौशल भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के भारत के दृष्टिकोण की ओर एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
  • स्थलीय और हवाई दोनों अनुप्रयोगों के लिए मानव रहित स्वायत्त वाहनों को वास्तविक समय में अपनाने में बाधा डालने वाली विभिन्न चुनौतियों को हल करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • वाहनों के स्वायत्त नेविगेशन का मूल्यांकन करने के लिए भारत में ऐसी कोई टेस्टेड सुविधा नहीं है। TiHAN का उद्देश्य कनेक्टेड ऑटोनॉमस व्हीकल्स (CAV) को समर्पित एक पूरी तरह कार्यात्मक और अनुकरणीय परीक्षण सुविधा विकसित करके इस अंतर को भरना है।

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डोनेट्स्क और लुहान्स्क

  • डोनेट्स्क और लुहान्स्क दो क्षेत्र हैं जो एक साथ यूक्रेन-रूस सीमा पर ‘डोनबास क्षेत्र’ बनाते हैं।
  • डोनबास एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है और संसाधन के दृष्टिकोण से यूक्रेन में सबसे बड़ा कोयला भंडार है।
  • ये दोनों क्षेत्र, 2014 में यूक्रेनी सरकार के नियंत्रण से अलग हो गए और खुद को स्वतंत्र “पीपल्स रिपब्लिक” घोषित कर दिया। डोनबास क्षेत्र रूस के लिए सामरिक लाभ भी प्रदान करता है। इस क्षेत्र को नियंत्रित करके, रूस क्रीमिया के लिए एक ‘भूमि पुल’ बनाने का इरादा रखता है, जिस पर उसने 2014 में कब्जा कर लिया था।
  • क्रीमिया में काला सागर और गर्म पानी के बंदरगाहों जैसे ‘सेवस्तोपोल’ तक पहुंच, इसे पूरे वर्ष महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों तक पहुंचने की अनुमति देती है।

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स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए गुजरात, कर्नाटक और मेघालय सर्वश्रेष्ठ राज्य: DPIIT रैंकिंग

  • उद्योग एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) रैंकिंग उभरते उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने के लिए की गई पहल पर आधारित है।
  • इस रैंकिंग में राज्यों को उनके आकार के आधार पर दो श्रेणियों – श्रेणी ए और श्रेणी बी – के तहत वर्गीकृत किया गया है। कर्नाटक और गुजरात ए श्रेणी में आते हैं और मेघालय बी श्रेणी में है।
  • ए श्रेणी में केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना और बी श्रेणी में जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों ने शीर्ष प्रदर्शन करने वालों का खिताब हासिल किया है।
  • पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित आठ राज्यों और तीन बी श्रेणी के राज्यों को नेता नामित किया गया है।

 

चेनकुरिंजी (Chenkurinji) को जलवायु परिवर्तन से बचाने की आवश्यकता

संदर्भ: शेंतुरुणी वन्यजीव अभयारण्य (Shendurney Wildlife Sanctuary) का नाम अगस्त्यमाला बायोस्फीयर रिजर्व के लिए स्थानिक प्रजाति ‘ग्लूटा ट्रैवनकोरिका’ (Gluta travancorica) से लिया गया है। ‘ग्लूटा ट्रैवनकोरिका’ को स्थानीय भाषा में ‘चेनकुरिंजी’ (Chenkurinji) के नाम से जाना जाता है।

शेंतुरुणी वन्यजीव अभयारण्य भारत के पश्चिमी घाट में एक संरक्षित क्षेत्र है, जो केरल के कोल्लम जिले में स्थित है और अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व के नियंत्रण में आता है।

औषधीय गुण: रक्तचाप को कम करने और गठिया के इलाज के लिए ‘चेनकुरिंजी’ उपयोग किया जाता है।

सेव चेनकुरिंजी’ (Save Chenkurinji): इसके संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया जाने वाला एक अभियान है।

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