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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 June 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक
  2. खरीफ सीजन 2022-23 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य
  3. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग
  4. ऑस्ट्रेलिया-भारत जल सुरक्षा पहल

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद
  2. राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल
  3. भांग को गैर-अपराध घोषित करने वाला एशिया का पहला देश

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस)


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा ‘सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली’ (Public Financial Management System – PFMS) का ‘एकल नोडल एजेंसी’ ( Single Nodal Agency- SNA) डैशबोर्ड लॉन्च किया गया।

SNA डैशबोर्ड के बारे में:

‘एकल नोडल एजेंसी डैशबोर्ड’  या ‘एसएनए डैशबोर्ड’ एक प्रमुख सुधार है, जिसे 2021 में ‘केंद्र प्रायोजित योजनाओं’ (Centrally Sponsored Schemes – CSS) के लिए धनराशि जारी करने, वितरित करने और निगरानी करने के तरीके के संबंध में शुरू किया गया था।

  • इस संशोधित प्रक्रिया, जिसे अब ‘एसएनए मॉडल’ कहा जाता है, के लिए हर एक राज्य को प्रत्येक योजना के लिए एक ‘सिंगल नोडल एजेंसी’ (SNA) की पहचान करना और उसे नामित करना आवश्यक होता है।
  • किसी विशेष योजना में उस राज्य के लिए सभी धनराशि अब इस बैंक खाते में जमा की जाती है और अन्य सभी कार्यान्वयन एजेंसियों की ओर से किए जाने वाले सभी खर्च इसी खाते से होती है।

‘SNA मॉडल’ का महत्व:

  1. यह प्रणाली निधियों का समय पर आवंटन सुनिश्चित करती है।
  2. ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ (CSS) निधियों का अधिक दक्षता से उपयोग किया जाता है।
  3. निधियों की निगरानी आसान हो गयी है।

Current Affairs

 

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के बारे में:

‘सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली’ (Public Financial Management System – PFMS) को ‘सेंट्रल प्लान स्कीम मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CPSMS) के रूप में जाना जाता था।

  • PFMS, एक वेब-आधारित ऑनलाइन सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है, जिसे वित्त मंत्रालय के लेखा महानियंत्रक (CGA) के कार्यालय द्वारा विकसित और कार्यान्वित किया जाता है।
  • उद्देश्य: एक कुशल निधि प्रवाह प्रणाली के साथ-साथ ‘भुगतान सह लेखा नेटवर्क’ स्थापित करके भारत सरकार के लिए एक मजबूत ‘सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली’ की सुविधा प्रदान करना।
  • कवरेज: वर्तमान में PFMS कवरेज के दायरे में केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र प्रायोजित स्कीमों के साथ-साथ वित्त आयोग अनुदान सहित अन्य व्यय शामिल हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के बारे में।
  2. PFMS कवरेज
  3. एसएनए डैशबोर्ड

मेंस लिंक:

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक


संदर्भ:

हाल ही में, ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ (7 जून) के अवसर पर ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) का चौथा ‘राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ (State Food Safety Index – SFSI) जारी किया गया।

इस सूचकांक में ‘खाद्य सुरक्षा’ के पांच मानकों पर राज्यों के प्रदर्शन को मापने का प्रयास किया गया है।

‘राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ (SFSI): परिचय

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण FSSAI द्वारा ‘खाद्य सुरक्षा’ के पांच महत्वपूर्ण मानकों पर राज्यों के प्रदर्शन को मापने के लिए वर्ष 2018-19 में ‘राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ (State Food Safety Index – SFSI) विकसित किया गया था।

यह सूचकांक हमारे नागरिकों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

‘खाद्य सुरक्षा’ के ‘पांच मानक’ निम्नलिखित हैं–

  1. मानव संसाधन और संस्थागत डेटा,
  2. अनुपालन,
  3. खाद्य परीक्षण – बुनियादी ढांचा और निगरानी,
  4. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण,
  5. उपभोक्ता सशक्तीकरण।

विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन:

  • इस वर्ष , राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक में, बड़े राज्यों में, तमिलनाडु शीर्ष स्थान पर रहा। उसके बाद, गुजरात और महाराष्ट्र का स्थान रहा।
  • छोटे राज्यों में, गोवा पहले स्थान पर रहा। उसके बाद, मणिपुर और सिक्किम का स्थान रहा।
  • केन्द्र – शासित प्रदेशों में, जम्मू एवं कश्मीर, दिल्ली और चंडीगढ़ ने क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया।

Current Affairs

 

‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’: परिचय

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) तथा संयुक्त राष्ट्र का ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (FAO) द्वारा संयुक्त रूप से सदस्य राज्यों अन्य संबंधित संगठनों के सहयोग से ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ (World food safety day) मनाया जाता है।
  • ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ को पहली बार 2019 में मनाया गया था।
  • उद्देश्य: वर्ष 2019 में “खाद्य सुरक्षा का भविष्य” के लक्ष्य के तहत ‘अदीस अबाबा सम्मेलन’ और ‘जिनेवा फोरम’ द्वारा ‘खाद्य सुरक्षा’ को बढ़ाने हेतु की गई प्रतिबद्धताओं को मज़बूत करना।
  • 2022 के लिए थीम: “सुरक्षित भोजन, बेहतर स्वास्थ्य”।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ के बारे में।
  2. ‘राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ के बारे में।
  3. राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक – विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन।

मेंस लिंक:

‘राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

खरीफ सीजन 2022-23 के लिए ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा खरीफ सत्र 2022-23 के लिए ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) को मंजूरी दी गयी थी। इसके तहत, 14 खरीफ फसलों की दरों में 4% से 8% तक की बढ़ोतरी की गई है।

Current Affairs

 

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): एक परिचय

‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (Minimum Support Prices -MSPs), किसी भी फसल का वह ‘न्यूनतम मूल्य’ होता है, जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदती है। वर्तमान में, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति, खरीफ और रबी, दोनों मौसमों में उगाई जाने वाली 23 फसलों के लिए ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ निर्धारित करती है।

इन अनिवार्य फसलों में, खरीफ मौसम की 14 फसलें, रबी की 6 फसलें और 2 अन्य वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं।

MSP की गणना:

‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) की गणना, किसानों की उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना कीमत के आधार पर की जाती है।

  • 2018-19 के केंद्रीय बजट में की गई घोषणा के अनुसार, MSP को उत्पादन लागत के डेढ़ गुना के बराबर रखा जाएगा।
  • ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) का निर्धारण ‘कृषि लागत एवं मूल्य आयोग’ (Commission for Agricultural Costs and PricesCACP) की संस्तुति पर, एक वर्ष में दो बार किया जाता है।
  • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग’ (CACP) एक वैधानिक निकाय है, जो खरीफ और रबी मौसम के लिए कीमतों की सिफारिश करने वाली अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करता है।

MSP निर्धारित करने में शामिल की जाने वाली उत्पादन लागतें: 

‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) का निर्धारण करते समय, ‘कृषि लागत एवं मूल्य आयोग’ (CACP), ‘A2+FL’ तथा ‘C2’ लागत, दोनों को ध्यान में रखता है।

  1. A2’ लागत में कि‍सान द्वारा सीधे नकद रूप में और बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई आदि पर किये गए सभी तरह के भुगतान को शामिल किया जाता है।
  2. A2+FL’ में ‘A2’ सहित अतिरिक्त अवैतनिक पारिवारिक श्रम का एक अनुमानित मूल्य शामिल किया जाता है।
  3. C2 लागत में, कुल नगद लागत और किसान के पारिवारिक पारिश्रामिक (A2+FL) के अलावा खेत की जमीन का किराया और कुल कृषि पूंजी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है।

कृपया ध्यान दें:

  • ‘कृषि लागत एवं मूल्य आयोग’ (CACP) द्वारा ‘प्रतिफल’ के लिए केवल A2+FL लागत की गणना की जाती है।
  • हालांकि, CACP द्वारा C2 लागतों का उपयोग मुख्य रूप से ‘बेंचमार्क संदर्भ लागत’ (अवसर लागत) के रूप में किया जाता है। इसके तहत, यह जांच की जाती है, कि क्या उनके द्वारा अनुशंसित ‘एमएसपी’ कम से कम कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में इन लागतों को कवर करते हैं।

MSP की सीमाएं:

  1. ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) के साथ प्रमुख समस्या गेहूं और चावल को छोड़कर अन्य सभी फसलों की खरीद के लिए सरकारी मशीनरी की कमी है। गेहूं और चावल की खरीद ‘भारतीय खाद्य निगम’ (FCI) के द्वारा ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (PDS) के तहत नियमित रूप से की जाती है।
  2. चूंकि राज्य सरकारों द्वारा अंतिम रूप से अनाज की खरीद की जाती है और जिन राज्यों में अनाज की खरीद पूरी तरह से सरकार द्वारा की जाती हैं, वहां के किसानो को अधिक लाभ होता है। जबकि कम खरीद करने वाले राज्यों के किसान अक्सर नुकसान में रहते हैं।
  3. MSP-आधारित खरीद प्रणाली बिचौलियों, कमीशन एजेंटों और APMC अधिकारियों पर भी निर्भर होती है, और छोटे किसानों के लिए इन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CCEA की संरचना।
  2. CACP क्या है?
  3. MSP योजना में कितनी फसलें शामिल हैं?

मेंस लिंक:

‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) के लिए वैधानिक समर्थन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग


संदर्भ:

हाल ही में, ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (Commission for Air Quality Management – CAQM)  द्वारा 1 जनवरी 2023 से पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में औद्योगिक, घरेलू और अन्य विविध अनुप्रयोगों में कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

आवश्यकता:

  • दिल्ली एनसीआर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित राजधानी शहरों में से एक है।
  • इससे सालाना 1.7 मिलियन टन कोयले को बचाने में मदद मिलेगी।
  • यह पार्टिकुलेट मैटर (PM), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), CO2 और CO सहित प्रदूषकों को कम करने में भी सहायक होगा।

‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’: परिचय

‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (Commission for Air Quality Management – CAQM) का गठन अक्टूबर 2020 में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश’, 2020 (‘Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Ordinance’) के तहत किया गया था ।

  • CAQM का गठन करने के लिए पूर्ववर्ती ‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’ (Environment Pollution (Prevention and Control) Authority) अर्थात EPCA को भंग कर दिया गया था।
  • ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ एक ‘सांविधिक प्राधिकरण’ (Statutory Authority) होगा।
  • यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकायों का अधिक्रमण (Supersede) करेगा।
  • 2021 में, संसद द्वारा ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग विधेयक’ को मंजूरी दी गयी थी।

संरचना:

आयोग की अध्यक्षता भारत सरकार के सचिव अथवा राज्य सरकार के मुख्य सचिव के रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी।

  • ‘अध्यक्ष’ तीन साल की अवधि तक या 70 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद पर कार्य करेगा।
  • आयोग में विभिन्न मंत्रालयों के साथ-साथ, हितधारक राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
  • इसमें, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और सिविल सोसाइटी के विशेषज्ञ भी सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

शक्तियां और कार्य:

  1. ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ को वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश जारी करने का अधिकार होगा।
  2. ‘आयोग’, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की सुरक्षा और सुधार के उद्देश्य से आवश्यक समझी जाने वाली शिकायतों पर विचार करेगा।
  3. वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मानदंड भी निर्धारित करेगा।
  4. आयोग के पास, उल्लंघन-कर्ताओं को चिह्नित करने, कारखानों, उद्योगों तथा किसी भी अन्य प्रदूषणकारी इकाई की निगरानी करने, और ऐसी इकाइयों को बंद करने की शक्ति होगी।
  5. आयोग के पास, NCR और आसपास के क्षेत्रों में, प्रदूषण मानदंडों का संभावित उल्लंघन करने वाले, राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए निर्देशों को रद्द करने का भी अधिकार होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. EPCA के बारे में
  2. NGT के बारे में
  3. CPCB के बारे में
  4. ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग विधेयक, 2021 का अवलोकन

मेंस लिंक:

‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’ (Environment Pollution (Prevention and Control) Authority) अर्थात EPCA को क्यों भंग कर दिया गया था, और इसकी जगह पर किस निकाय का गठन किया गया है?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ऑस्ट्रेलिया-भारत जल सुरक्षा पहल


संदर्भ:

हाल ही में, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और ऑस्ट्रेलिया सरकार के बीच शहरी जल प्रबंधन में तकनीकी सहयोग के लिए एक ‘समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

महत्व:

  • यह समझौता ज्ञापन ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत जल सुरक्षा पहल’ (Australia-India Water Security Initiative – AIWASI) के तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।
  • यह शहरी जल प्रबंधन के लिए सभी स्तरों पर संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करेगा;।
  • समझौता ज्ञापन दोनों पक्षों को शहरी जल सुरक्षा के प्रमुख क्षेत्रों में दो देशों द्वारा प्राप्त तकनीकी प्रगति के बारे में जानकारी लेने में सक्षम करेगा और ज्ञान के आदान-प्रदान, सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों और संस्थानों के क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा।

Current Affairs

 

‘ऑस्ट्रेलिया-भारत जल सुरक्षा पहल’ (AIWASI): परिचय

  • ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत जल सुरक्षा पहल’ (Australia-India Water Security Initiative – AIWASI) ऑस्ट्रेलिया के ‘विदेश मामलों और व्यापार विभाग’ (DFAT) की ‘दक्षिण एशिया जल सुरक्षा पहल’ (SAWASI) के तहत एक परियोजना है।
  • इसका उद्देश्य एकीकृत जल चक्र के समग्र प्रबंधन पर आधारित ‘जल संवेदनशील शहर परिकल्पना की दिशा’ में कार्य करना है।
  • इस पहल के तहत, वंचित समुदायों को विश्वसनीय, सुरक्षित पानी और स्वच्छता सेवाओं तक पहुंचने के लिए शहरी जल सेवाएं सहायता प्रदान करने हेतु निवेश किया जाएगा।

AIWASI परियोजना कई शैक्षिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों- जैसे- छात्रों और समुदाय की जल जागरूकता, हरित स्थानों का निर्माण, हरित बुनियादी ढांचे (Blue-Green Infrastructure) का निर्माण और अवक्रमित जल निकायों तथा जलभृतों (Aquifers) का कायाकल्प आदि- के साथ एक ‘जीवंत प्रयोगशाला’ भी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऑस्ट्रेलिया-भारत जल सुरक्षा पहल (AIWASI)
  2. दक्षिण एशिया जल सुरक्षा पहल (SAWASI)
  3. जल संवेदनशील शहर की परिकल्पना

मेंस लिंक:

ऑस्ट्रेलिया-भारत जल सुरक्षा पहल (AIWASI) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद

हाल ही में, ‘जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद’ (Biotechnology Industry Research Assistance Council – BIRAC) की स्थापना के दस साल पूरे होने पर, ‘बायोटेक स्टार्टअप एक्सपो – 2022’ की शुरुआत की गयी थी।

बायोटेक स्टार्टअप एक्सपो – 2022’ की थीम: ‘बायोटेक स्टार्टअप इनोवेशन: टूवर्ड्स आत्मनिर्भर भारत’ ।

BIRAC के बारे में:

  • ‘जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद’ (BIRAC), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा स्थापित एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है।
  • उद्देश्य: राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक उत्पाद विकास आवश्यकताओं को संबोधित करते हुए, रणनीतिक अनुसंधान और नवाचार करने के लिए उभरते बायोटेक उद्यम को मजबूत और सशक्त बनाना।

कार्य:

  • लक्षित वित्त पोषण के माध्यम से ‘जोखिम पूंजी’ (Risk Capital) तक पहुंच प्रदान करना।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।
  • बायोटेक फर्मों के लिए नवाचार उत्कृष्टता लाने में मदद करने एवं उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु ‘आईपी ​​प्रबंधन’ और ‘हैंडहोल्डिंग योजनाएं’।

 

राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों द्वारा ऐसे लोगों को सम्मानित करने के लिए कई नागरिक पुरस्कारों की स्थापना की गई है जिन्होंने अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट और असाधारण योगदान दिया है।

  • विभिन्न पुरस्कारों के लिए नामांकन आमंत्रित करने के लिए, सरकार द्वारा एक सामान्य ‘राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल’ (Rashtriya Puruskar Portal) विकसित किया गया है।
  • यह पोर्टल भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों के सभी पुरस्कारों को पारदर्शिता और सार्वजनिक भागीदारी (जनभागीदारी) सुनिश्चित करने करने में मदद करेगा।
  • इस पोर्टल का उद्देश्य नागरिकों को भारत सरकार द्वारा स्थापित विभिन्न पुरस्कारों के लिए व्यक्तियों/संगठनों को नामांकित करने की सुविधा प्रदान करना है।

भांग को गैर-अपराध घोषित करने वाला एशिया का पहला देश

  • थाईलैंड, मारिजुआना (Marijuana) को गैर-अपराध घोषित करने वाला एशिया का पहला ऐसा देश बन गया है। मारिजुआना को भांग / चरस / गांजा / कैनबिस (Cannabis) आदि नामों से भी जाना जाता है।
  • थाईलैंड ने अपने कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मारिजुआना को ‘अपराध से मुक्त’ कर दिया है।
  • गैर-अपराधीकरण के तहत, अब थाईलैंड में मारिजुआना और भांग उत्पादों को उगाना और उनका व्यापार करना, या बीमारियों के इलाज के लिए पौधे के कुछ हिस्सों का उपयोग करना अपराध नहीं होगा।

2018 में, कनाडा भांग के मनोरंजक उपयोग को वैध बनाने वाला पहला G20 देश बन गया था। उरुग्वे में 2013 में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी वयस्कों के लिए मारिजुआना के मनोरंजक उपयोग को वैध कर दिया गया था।