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[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 9 June 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. न्यायालय की अवमानना
  2. बिम्सटेक

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति
  2. लिथियम
  3. यमुना नदी प्रदूषण
  4. हाथियों और बाघों की गणना हेतु सामान्य सर्वेक्षण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. विश्व महासागर दिवस 2022

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

अदालत की अवमानना


संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट ने धमकी देते हुए कहा है, कि यदि राज्य सरकार दो सप्ताह के भीतर ₹ 2.5 लाख की राशि जमा करने में विफल रहती है, तो तेलंगाना के मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना ​​​​कार्यवाही (Contempt Proceedings) शुरू की जाएगी।

संबंधित प्रकरण:

  • शीर्ष अदालत ने अप्रैल 2020 के फैसले में ‘एकीकृत आंध्र प्रदेश सरकार’ द्वारा पारित एक कानून को रद्द करते हुए राज्य सरकार पर दंड स्वरूप यह राशि अदालत में जमा करने का आदेश दिया था। इस क़ानून के माध्यम से तत्कालीन राज्य सरकार ने राज्य के भीतर अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में 100% शिक्षक पदों को स्थानीय अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया था।
  • शीर्ष अदालत ने 22 अप्रैल, 2020 के अपने फैसले में ₹5 लाख की दंड राशि को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों द्वारा समान रूप से भुगतान करने के लिए विभाजित कर दिया गया, किंतु तेलंगाना सरकार द्वारा दंड राशि के अपने हिस्से का भुगतान करने में देरी की जा रही है।

अवमानना ​​क्या होती है?

यद्यपि ‘अवमानना ​​कानून’ (Contempt Law) का मूल विचार उन लोगों को दंडित करना है जो अदालतों के आदेशों का सम्मान नहीं करते हैं। किंतु भारतीय संदर्भ में, अवमानना ​​​​का उपयोग अदालत की गरिमा को कम करने तथा न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप करने वाली भाषा अथवा व्यक्तव्यों को दंडित करने के लिए भी किया जाता है।

अदालत की अवमानना दो प्रकार की हो सकती है: सिविल अवमानना तथा आपराधिक अवमानना।

  1. सिविल अवमानना: सिविल अवमानना को किसी भी फैसले, आदेश, दिशा, निर्देश, रिट या अदालत की अन्य प्रक्रिया अथवा अदालत में दिए गए वचन के जानबूझ कर किये गए उल्लंघन के रूप में परिभाषित किया गया है।
  2. आपराधिक अवमानना: आपराधिक अवमानना के तहत, किसी भी ऐसे विषय (मौखिक या लिखित शब्दों से, संकेतों, दृश्य प्रतिबिंबो, अथवा किसी अन्य प्रकार से) के प्रकाशन द्वारा अदालत की निंदा करने अथवा न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने अथवा बाधा डालने के प्रयास को सम्मिलित किया जाता है।

प्रासंगिक प्रावधान:

  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 में क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय को न्यायालय की अवमानना के लिए दोषी व्यक्तियों को दंडित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
  2. 1971 के अवमानना अधिनियम की धारा 10 में उच्च न्यायालय द्वारा अपने अधीनस्थ न्यायालयों को अवमानना करने पर दंडित करने संबंधी शक्तियों को परिभाषित किया गया है।
  3. संविधान में लोक व्यवस्था तथा मानहानि जैसे संदर्भो सहित अदालत की अवमानना के रूप में, अनुच्छेद 19 के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध को भी सम्मिलित किया गया है।

अदालतों के लिए अवमानना शक्तियों की आवश्यकता:

  • न्यायिक आदेशों को सुनिश्चित रूप से लागू करने के लिए।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्र प्रकृति को बनाए रखने के लिए।
  • न्यायपालिका द्वारा जारी किये गए आदेशों को सरकार अथवा निजी पक्षकारों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। यदि अदालतें अपने आदेशों को लागू करने में असमर्थ हो जायेगी तो विधि का शासन संकट में पड़ जाएगा।

अवमानना क़ानून से जुड़े मुद्दे:

  • संविधान का अनुच्छेद 19 (1) (ए) सभी नागरिकों को वाक् तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। किंतु अदालती कार्यवाही के विरुद्ध बोलने पर ‘अवमानना प्रावधानों’ के अंतर्गत वाक् तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबन्ध लगाया गया है।
  • अवमानना कानून काफी हद तक व्यक्तिपरक (subjective) है जिसका उपयोग न्यायपालिका द्वारा स्वैच्छिक ढंग से जनता द्वारा उसकी आलोचना को दबाने के लिए किया जा सकता है।

प्रशांत भूषण मामले का विश्लेषण:

प्रशांत भूषण के विरुद्ध उच्चत्तम न्यायालय की एक पीठ द्वारा आरंभ की गयी स्व-प्रेरित अवमानना कार्यवाही, न्यायालय के अवमानना क्षेत्राधिकार का दुरूपयोग है। इसका उपयोग उचित कारणों के होने पर संयम तथा सावधानी से किया जाना चाहिए।

  • क्योंकि, कुछ विधि विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत भूषण के ट्वीट्स में ऐसा कुछ नहीं है जिससे अदालत की अवमानना के रूप में माना जा सके।
  • प्रशांत भूषण के ट्वीट्स, अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार की सीमा में हैं, जिसके तहत वह भारत के मुख्य न्यायाधीश के एक निजी व्यक्ति के रूप में आचरण पर टिप्पणी तथा आलोचना करने को स्वतंत्र है।
  • इसके अतिरिक्त, प्रश्नगत ट्वीट्स, समझ एवं टिप्पणी के दायरे में आते हैं तथा अवमानना की सीमा का उल्लंघन नहीं करते हैं। अवमानना का सामान्य सिद्धांत यह है कि व्यक्ति किसी निर्णय की आलोचना कर सकता है लेकिन निर्णय के लिए न्यायाधीश को अभिप्रेत नहीं किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवमानना के संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायलय की शक्तियां
  2. इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान
  3. न्यायलय की अवमानना (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा किये गए परिवर्तन

मेंस लिंक:

भारत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामलों को किस प्रकार हल किया जाता है?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

बिम्सटेक


संदर्भ:

6 जून को वर्ष 1997 के ‘बैंकॉक घोषणापत्र’ (Bangkok Declaration) के 25 साल पूरे हो गए। इस घोषणापत्र के द्वारा ‘बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड’- आर्थिक सहयोग (BIST-EC) नामक एक साधारण समूह की शुरुआत की गयी थी।

बाद में, इस समूह में ‘नेपाल, भूटान और म्यांमार’ तीन देश शामिल हो गए, जिसके पश्चात् इस समूह को बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल अर्थात ‘बिम्सटेक’ (Bay of Bengal Multi-

प्रमुख उपलब्धियां:

  1. बिम्सटेक द्वारा ‘सहयोग क्षेत्रों’ को प्राथमिकता दी जा रही है। इन सहयोग क्षेत्रों की संख्या शुरुआती अप्रबंधनीय 14 क्षेत्रों से घटाकर ‘अधिक प्रबंधनीय’ सात सहयोग क्षेत्र कर दी गयी है, और प्रत्येक सदस्य-देश को एक ‘सहयोग क्षेत्र’ निर्दिष्ट किया गया है, जिसमे वह अग्रणी देश के रूप में कार्य कर रहा है।
  2. ‘बिम्सटेक’ द्वारा अपने सचिवालय को मजबूत करने के उपाय किए जा रहे हैं, हालांकि कुछ सदस्य देशों ने अभी तक इसे पर्याप्त कर्मियों के रूप में अपना सहयोग नहीं दिया है।
  3. समूह ने आतंकवाद का मुकाबला करने, सुरक्षा सहयोग स्थापित करने और मानवीय सहायता और आपदा राहत के बेहतर प्रबंधन के लिए तंत्र और प्रथाओं को बनाने में भी प्रगति दर्ज की है।

आगे की चुनौतियां:

  • यह समूह ‘फ्रेमवर्क समझौते’ पर हस्ताक्षर करने के 18 साल बाद भी एक व्यापक ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (Free Trade AgreementFTA) तैयार करने में निरंतर असमर्थ रहा है।
  • एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा समर्थित कनेक्टिविटी के लिए मास्टर प्लान को अपनाने के बावजूद, ‘कनेक्टिविटी’ के मामले में अब तक केवल सीमित प्रगति ही हासिल हुई है।
  • ‘बिम्सटेक विकास कोष’ की स्थापना की दिशा में कार्रवाही न्यूनतम है।

बिम्सटेक (BIMSTEC) क्या है?

बिम्सटेक (BIMSTEC), दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के सात देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। वर्ष 1997 में, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को एकीकृत करने के प्रयास में इस समूह की स्थापना की गई थी। मूल रूप से इस समूह में बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे, बाद में म्यांमार, नेपाल और भूटान भी इसके सदस्य बन गए।

बिम्सटेक में, अब दक्षिण एशिया के पांच देश और आसियान के दो देश शामिल हैं तथा यह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के मध्य एक सेतु की भूमिका भी निभाता है। इस समूह में मालदीव, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को छोड़कर दक्षिण एशिया के सभी प्रमुख देश शामिल हैं।

बिम्सटेक क्षेत्र का महत्व:

  • बिम्सटेक के सात देशों और इसके आसपास में विश्व की कुल आबादी का लगभग पांचवा भाग (22%) निवास करता है, और इनका संयुक्त रूप से सकल घरेलू उत्पाद $ 2.7 ट्रिलियन के करीब है।
  • बंगाल की खाड़ी, प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, जिसका अभी तक दोहन नहीं किया गया है। विश्व में व्यापार की जाने वाली कुल सामग्री का लगभग एक-चौथाई भाग, प्रतिवर्ष बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरता है।

भारत के लिए बिम्सटेक का महत्व:

  • इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के लिए यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है।
  • बिम्सटेक, न केवल दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों को जोड़ता है, बल्कि महान हिमालय और बंगाल की खाड़ी की पारिस्थितिकी को परस्पर संबद्ध करता है।
  • भारत के लिए, यह ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ की प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताओं को कार्यान्वित करने के लिए एक प्राकृतिक मंच है।
  • नई दिल्ली के लिए, बिम्सटेक से सम्बद्धता का एक प्रमुख कारण इस क्षेत्र की विशाल संभावनाएं हैं, जो दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग खोलती हैं।
  • लगभग 300 मिलियन लोग या भारत की लगभग एक-चौथाई आबादी, बंगाल की खाड़ी से सटे चार तटीय राज्यों (आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) में निवास करती है।
  • रणनीतिक दृष्टिकोण से, बंगाल की खाड़ी, जोकि मलक्का जलडमरूमध्य के लिए एक कीप (funnel) की भांति है, लगातार प्रभावशाली होते जा रहे चीन के लिए हिंद महासागर तक अपनी पहुँच बनाए रखने के लिए, एक प्रमुख थिएटर के रूप में उभरा है।
  • चूंकि चीन द्वारा हिंद महासागर में पनडुब्बियों तथा जहाजों की आवाजाही में बढ़ोत्तरी सहित बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में प्रभुत्व जमाने वाली गतिविधियाँ की जा रही हैं, ऐसे में बिम्सटेक देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना भारत के हित में होगा।

Current Affairs

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बिमस्टेक के बारे में।
  2. सदस्य देश।
  3. उद्देश्य।

मेंस लिंक:

भारत के लिए बिमस्टेक के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति


संदर्भ:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा, हाल ही में आयोजित अपनी ‘द्विमासिक नीति समीक्षा बैठक में प्रमुख ‘रेपो दर’ में 50 आधार अंकों की वृद्धि की गयी है, हालाँकि ‘नकद आरक्षित अनुपात’ (Cash Reserve Ratio) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

समायोजक नीति को वापस लेना:

‘मौद्रिक नीति समिति’ (Monetary Policy Committee – MPC) द्वारा मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर बनाए रखने को सुनिश्चित करने तथा आगे बढ़कर, विकास को सहयोग करते हुए इन सुविधाओं को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया गया है।

  • This clearly indicates that the RBI is in no mood to continue with an accommodative stance, and it is most likely to increase the rate in its next policy meeting in August 2022.

यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है, कि आरबीआई एक ‘उदार मुद्रा’ (Accommodative Stance) जारी रखने के मूड में नहीं है, और अगस्त 2022 में होने वाली ‘मौद्रिक नीति समिति’ की अगली बैठक में ‘ब्याज दरों’ में वृद्धि किए जाने की संभावना है।

‘उदार नीतिगत मुद्रा’ का तात्पर्य:

‘उदार नीतिगत मुद्रा / रवैया’ (Accommodative Policy Stance) का तात्पर्य है, कि केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘मुद्रा आपूर्ति’ का विस्तार करने के लिए तैयार है। केंद्रीय बैंक, ‘उदार नीति अवधि’ के दौरान, ब्याज दरों में कटौती करने को तैयार रहती है।

‘रेपो रेट’ (Repo Rate) क्या होता है?

‘रेपो’ (Repo) का तात्पर्य ‘पुनर्खरीद विकल्प’ (Repurchasing Option) होता है। ‘रेपो रेट’ (Repo Rate) उस दर को संदर्भित करता है, जिस पर ‘वाणिज्यिक बैंक’ धन की कमी के मामले में आरबीआई से धन उधार लेते हैं।

‘रेपो रेट’, मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने हेतु ‘आरबीआई’ के मुख्य उपकरणों में से एक है।

Current Affairs

 

‘मौद्रिक नीति समिति’ के बारे में:

  • केंद्र सरकार द्वारा गठित आरबीआई की ‘मौद्रिक नीति समिति’ (Monetary Policy Committee – MPC) का कार्य, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, बैंक दर, नकद आरक्षित अनुपात (CRR) जैसे उपकरणों का उपयोग करके ‘मौद्रिक नीति’ तैयार करने का है।
  • इसका गठन, भारत की केंद्र सरकार द्वारा 1934 में संशोधित आरबीआई अधिनियम की धारा 45ZB के तहत किया गया है।

कार्य:

‘मौद्रिक नीति समिति’ (MPC) को सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility – MSF) , रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और चलनिधि समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility) सहित विभिन्न नीतिगत दरों को तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

‘मौद्रिक नीति समिति’ की संरचना:

इस समिति में छह सदस्य होंगे। छह सदस्यों में से तीन को सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा। इस समिति में किसी भी सरकारी अधिकारी को मनोनीत नहीं किया जाएगा।

  • समिति के अन्य तीन सदस्य, आरबीआई से शामिल किए जाएंगे।
  • आरबीआई का गवर्नर,‘मौद्रिक नीति समिति’ पदेन अध्यक्ष होंगे।
  • मौद्रिक नीति के प्रभारी आरबीआई के डिप्टी गवर्नर, इस समिति के सदस्य होंगे।
  • साथ ही, केंद्रीय बैंक के कार्यकारी निदेशक भी इस समिति के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

सदस्यों का चयन एवं कार्यकाल:

चयन: ‘मौद्रिक नीति समिति’ के लिए सरकार द्वारा मनोनीत किए जाने वाले सदस्यों का चयन, कैबिनेट सचिव के नेतृत्व में रिजर्व बैंक के गवर्नर और आर्थिक मामलों के सचिव एवं अर्थशास्त्र या बैंकिंग या वित्त या मौद्रिक नीति के क्षेत्र में तीन विशेषज्ञ सदस्यों की एक खोज-सह-चयन समिति द्वारा किया जाएगा।

कार्यकाल: ‘मौद्रिक नीति समिति’ के सदस्यों को चार साल की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा और वे पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे।

समिति की निर्णय प्रक्रिया:

‘मौद्रिक नीति समिति’ के निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाएंगे। समिति के प्रत्येक सदस्य को मत देना का अधिकार होगा।

आरबीआई गवर्नर की भूमिका: आरबीआई गवर्नर समिति की अध्यक्षता करेंगे। हालांकि, गवर्नर के पास समिति के अन्य सदस्यों को खारिज करने के लिए वीटो शक्ति नहीं होगी, किंतु ‘बराबर मत होने की स्थिति’ में उनका मत निर्णायक होगा।

‘आरबीआई की मौद्रिक नीति’ के बारे में:

‘मौद्रिक नीति’ शब्द का तात्पर्य ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ की उस नीति से है जिसके तहत, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि को प्राप्त करने और मुद्रास्फीति दर को कम करने के उद्देश्य, से आरबीआई द्वारा अपने नियंत्रण में आने वाले मौद्रिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

‘भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934’ के अंतर्गत आरबीआई को मौद्रिक नीति बनाने की शक्ति प्रदान की गयी है।

मौद्रिक नीति के लक्ष्य:

मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। मूल्य स्थिरता संधारणीय वृद्धि की आवश्यक पूर्व शर्त है।

  • ‘चक्रवर्ती समिति’ द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार, भारत की मौद्रिक नीति की कुछ महत्वपूर्ण भूमिकाएँ, मूल्य स्थिरता, आर्थिक विकास, इक्विटी, सामाजिक न्याय और नए वित्तीय उद्यमों के विकास को प्रोत्साहित करने जैसे पहलू हैं।
  • भारत सरकार द्वारा भारत की जीडीपी के विकास दर में तेजी लाने की कोशिश की जाती है, जबकि आरबीआई मुद्रास्फीति की दर को एक स्थायी सीमा के भीतर नीचे लाने की कोशिश में रहती है।
  • अपने मुख्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, ‘मौद्रिक नीति समिति’ देश के समक्ष मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करने हेतु एक आदर्श नीति ब्याज दर निर्धारित करती है।

मौद्रिक नीति की लिखतें एवं उनका प्रबंधन:

(Monetary Policy Instruments and how they are managed)

मौद्रिक नीति लिखत (Monetary Policy Instruments) दो प्रकार के होते हैं, अर्थात् गुणात्मक लिखित और मात्रात्मक लिखित।

  1. मात्रात्मक लिखितों (Quantitative Instruments) की सूची में, ओपन मार्केट ऑपरेशंस, बैंक रेट, रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, कैश रिजर्व रेशियो, वैधानिक लिक्विडिटी रेशियो, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) शामिल होते हैं।
  2. गुणात्मक लिखितों (Qualitative Instruments) के तहत प्रत्यक्ष कार्रवाई, मार्जिन मनी में परिवर्तन और नैतिक दबाव (Moral Suasion) शामिल होते हैं।

 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

लिथियम


संदर्भ:

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में तेजी से वृद्धि होने के साथ ही, ‘इलेक्ट्रिक बैटरी निर्माताओं’ के लिए एक आवश्यक संसाधन ‘लिथियम’ की मांग भी बढ़ गई है।

महत्व:

यह अनुमान है, कि यदि अफ्रीकी खदानों से संपूर्ण अयस्क निकाला जाता है, तो यह 60 kWh बैटरी वाले कम से कम 27.78 मिलियन वाहनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।

लिथियम (Lithium) के बारे में:

  • यह एक नरम तथा चांदी के समान सफेद धातु होती है तथा मानक परिस्थितियों में, यह सबसे हल्की धातु और सबसे हल्का ठोस तत्व है।
  • यह अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और ज्वलनशील होती है अत: इसे खनिज तेल में संगृहित किया जाना चाहिये।
  • यह एक क्षारीय एवं दुर्लभ धातु है।

प्रमुख विशेषताएं एवं गुण:

  • इसमें किसी भी ठोस तत्व की तुलना में उच्चतम विशिष्ट ऊष्मा क्षमता होती है।
  • लिथियम का सिंगल बैलेंस इलेक्ट्रॉन इसे विद्युत् का अच्छा संवाहक बनाता है।
  • यह ज्वलनशील होता है तथा हवा एवं पानी के संपर्क में आने पर विस्फोटित भी हो सकता है।

उपयोग:

  1. लिथियम, नई प्रौद्योगिकियों के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है और इसका उपयोग सिरेमिक, शीशा, दूरसंचार और अंतरिक्ष संबंधी उद्योगों में किया जाता है।
  2. लिथियम का सर्वाधिक उपयोग मुख्य रूप से, लिथियम आयन बैटरी निर्माण में, लूब्रिकैटिंग ग्रीस, एल्युमिनियम के साथ विमान के पुर्जे बनाने में, रॉकेट प्रणोदकों के लिए उच्च ऊर्जा योजक, मोबाइल फोन के लिए ऑप्टिकल मॉड्यूलेटर तथा थर्मोन्यूक्लियर अभिक्रियाओं में किया जाता है।

नियत पदार्थ (Prescribed substance):

  • थर्मोन्यूक्लियर अनुप्रयोगों के कारण, लिथियम को परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत “नियत पदार्थ” के रूप में घोषित किया गया है। अधिनियम के अंतर्गत, देश के विभिन्न भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में लिथियम की खोज के लिए AMD को अनुमति प्रदान की गई है।
  • परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत, “नियत पदार्थ” का तात्पर्य, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित उन पदार्थों से होता है, जो परमाणु ऊर्जा के उत्पादन या उसके उपयोग अथवा इससे संबंधित पदार्थो जैसे कि, यूरेनियम, प्लूटोनियम, थोरियम, बेरिलियम, ड्यूटेरियम या उनके यौगिकों के अनुसंधान में उपयोग किये जा सकते है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लिथियम के बारे में
  2. गुण
  3. उपयोग
  4. भारत में लिथियम का भंडार
  5. दुनिया भर में लिथियम का भंडार

मेंस लिंक:

‘लिथियम आयन बैटरी’ के लाभों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

यमुना नदी प्रदूषण


(Yamuna river pollution)

संदर्भ:

नदी कार्यकर्ताओं द्वारा यमुना नदी को बचाने के लिए तत्काल उपाय किए जाने की मांग की जा रही है।

कार्यकर्ताओं की मांगें:

  1. ताजमहल के नीचे की ओर ‘रबर चेक डैम (Rubber check dam) का निर्माण किया जाए।
  2. आगरा और मथुरा के लिए यमुना के पानी का एक बड़ा हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए 1994 के यमुना जल वितरण समझौते पर फिर से विचार किया जाए।
  3. एक व्यापक राष्ट्रीय नदी नीति तैयार की जाए।
  4. देश की सभी बड़ी नदियों के प्रबंधन हेतु एक ‘केंद्रीय नदी प्राधिकरण’ का गठन किया जाए।

यमुना इतनी प्रदूषित क्यों है?

  1. दिल्ली के ‘सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट’ नदी में छोड़े जा रहे प्रदूषकों के लिए सर्वाधिक बड़े योगदानकर्ता हैं।
  2. विभिन्न प्रकार के उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषक, भी एक प्रमुख मुद्दा है।
  3. दिल्ली में नदी के किनारे कृषि-गतिविधियाँ भी नदी के प्रदूषण में योगदान करती हैं।
  4. हरियाणा के खेतों से कृषि अपशिष्ट और कीटनाशकों का निर्वहन भी प्रदूषण में योगदान देता है।
  5. नदी में जल प्रवाह की मात्रा कम होने के कारण प्रदूषक जमा हो जाते हैं और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।

यमुना नदी के बारे में:

  • यमुना नदी, गंगा की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • इसकी उत्पत्ति उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बंदरपूँछ शिखर के पास यमुनोत्री नामक ग्लेशियर से निकलती है।
  • यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से प्रवाहित होने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी से मिलती है।
  • चंबल, सिंध, बेतवा और केन इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि अनुच्छेद 21 में ‘जीवन के अधिकार’ के व्यापक शीर्षक के तहत, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, और  प्रदूषण मुक्त जल का अधिकार से संबंधित प्रावधान किए गए हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यमुना नदी कितने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर बहती है?
  2. यमुना की सहायक नदियाँ
  3. पीने के पानी में अमोनिया की अधिकतम स्वीकार्य सीमा?

मेंस लिंक:

भारत में नदी प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

हाथियों और बड़ी बिल्ली प्रजातियों की गणना हेतु सामूहिक सर्वेक्षण


संदर्भ:

भारत सरकार इस साल पहली बार देश के बाघ, तेंदुआ और हाथियों की आबादी की एकीकृत गिनती पेश करेगी।

नई विधि के लाभ:

  • यह देखते हुए कि आमतौर पर हाथियों और बाघों के वास-स्थानों का लगभग 90% क्षेत्र एक ही होता है, और एक बार ‘आकलन विधियों’ के मानकीकृत होने के बाद, एक सामूहिक सर्वेक्षण होने से इन प्राणियों की गणना लागत में काफी बचत हो सकती है।
  • इसके अलावा, हाथियों की गिनती के लिए ‘हेड काउंट’ पद्धति, या वर्तमान में इस्तेमाल की जाने वाली पद्धति काफी “पुरानी” हो चुकी है और अक्सर इसमें एक ही जानवर की गिनती कई बार हो जाती है।

नई विधि के लाभ:

आमतौर पर, हाथियों और बाघों की आबादी वाला 90% क्षेत्र एक ही होता है, इसे देखते हुए जब आकलन विधियों के मानदंड तय हो जाएंगे, फिर ‘सामूहिक सर्वेक्षण’ किए जाने से इनकी गणना पर होने व्यय में काफी बचत हो सकती है।

वर्तमान में हाथियों और बाघों की गणना किस प्रकार की जाती है?

वर्तमान में, ‘बाघ सर्वेक्षण’ आमतौर पर चार साल में एक बार होता है, और हाथियों की गिनती पांच साल में एक बार की जाती है।

  1. पर्यावरण मंत्रालय से संबद्ध ‘भारतीय वन्यजीव संस्थान’ (WII), देहरादून द्वारा, वर्ष 2006 में, बाघों की गणना हेतु एक प्रोटोकॉल मानदंड तैयार किए गए थे। बाघों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए, राज्यों द्वारा इन मानदंडो का उपयोग किया जाता है। ‘कैमरा ट्रैप’ और ‘अप्रत्यक्ष आकलन विधियों’ द्वारा देखे जाने के आधार पर, बाघों की गणना की जाती है।
  2. हाथियों की गणना, मुख्य रूप से राज्यों पर निर्भर करती है। हाल के वर्षों में, हाथियों में जन्म दर और जनसंख्या प्रवृत्तियों का अनुमान लगाने के लिए ‘हाथियों की लीद के नमूनों का विश्लेषण’ करने जैसी तकनीकों को भी लागू किया गया है।

देश में बाघ और हाथियों की संख्या:

सबसे नवीनतम 2018-19 के सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 2,997 थी। वर्ष 2017 में की गई अंतिम गणना के अनुसार भारत में हाथियों की संख्या 29,964 थी।

हाथियों और उनके गलियारों के संरक्षण के उद्देश्य से अखिल भारतीय स्तर पर प्रयास:

  • वर्ष 2017 में विश्व हाथी दिवस के अवसर पर, हाथियों की सुरक्षा हेतु एक राष्ट्रव्यापी अभियान, ‘गज यात्रा’ का आरंभ किया गया था।
  • इस अभियान में हाथी रेंज के 12 राज्यों को शामिल करने की योजना है।
  • इस अभियान का उद्देश्य अपने अदिवासों में मुक्त आवागमन को प्रोत्साहित करने हेतु ‘हाथी गलियारों’ के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

मानव-हाथी संघर्ष के प्रबंधन हेतु वन मंत्रालय के दिशा-निर्देश:

  1. हाथियों को उनके प्राकृतिक आवासों में रखने हेतु जल स्रोतों का निर्माण तथा जंगलों की आग को नियंत्रित करना।
  2. तमिलनाडु में हाथियों के लिए अभेद्द्य खाइयाँ (Elephant Proof trenches) ।
  3. कर्नाटक में लटकती बाड़ और छोटे-छोटे पत्थरों की दीवारें (Hanging fences and rubble walls)।
  4. उत्तर बंगाल में मिर्च के धुएं और असम में मधुमक्खियों अथवा मांसाहारी जीवों की आवाज़ का उपयोग।
  5. प्रौद्योगिकी का उपयोग: दक्षिण बंगाल में हाथियों की पहचान, और निगरानी तथा हाथियों की उपस्थिति संबंधी चेतावनी हेतु एसएमएस अलर्ट भेजना।

इस संबंध में निजी संगठनों के प्रयास:

  • एशियाई हाथी गठबंधन (Asian Elephant Alliance), पाँच NGO की एक संयुक्त छाता पहल है। इसकी स्थापना, पिछले साल, भारत के 12 राज्यों में हाथियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 101 मौजूदा गलियारों में से 96 को सुरक्षित करने के लिए की गयी थी।
  • NGO हाथी परिवार, अंतर्राष्ट्रीय पशु कल्याण कोष, IUCN नीदरलैंड और विश्व भूमि ट्रस्ट द्वारा भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट (WTI) के साथ मिलकर ‘हाथी कोरिडोर’ संरक्षण हेतु कार्य किया जा रहा है।

‘एशियाई हाथियों’ के बारे में:

  1. संकटग्रस्त प्रजातियों की IUCN रेड लिस्ट में एशियाई हाथियों को “लुप्तप्राय” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  2. विश्व की 60% से अधिक हाथी आबादी भारत में है।
  3. हाथी भारत का प्राकृतिक विरासत पशु है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि 1992 में भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा जंगली एशियाई हाथियों की आबादी हेतु ‘वन्यजीव प्रबंधन’ प्रयासों के लिए, राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए ‘प्रोजेक्ट हाथी’ शुरू किया गया था?

क्या आपने एशियाई हाथी विशेषज्ञ समूह (Asian Elephant Specialist Group) के बारे में सुना है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एशियाई हाथी की IUCN संरक्षण स्थिति
  2. भारत में हाथी गलियारे।
  3. हाथियों का प्रजनन काल

मेंस लिंक:

पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मानव-हाथी संघर्ष के प्रबंधन के लिए सुझाए गए उपायों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 विश्व महासागर दिवस 2022

हर साल 8 जून ‘विश्व महासागर दिवस’ (World Oceans Day) को मनाया जाता है।

  • 2022 के लिए थीम: “पुनरोद्धार: महासागर के लिए सामूहिक कार्रवाई” (Revitalization: Collective Action for the Ocean) ।
  • विश्व महासागर दिवस की अवधारणा को पहली बार 1992 में ‘रियो डी जनेरियो’ में पृथ्वी शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित किया गया था।

महासागरों का महत्व:

  • पृथ्वी की सतह के 71% हिस्सा महासागर हैं और ग्रह के कुल पानी का 97% हिस्सा महासागरों में पाया जाता है।
  • महासागर, विश्व का पेट भरने में मदद करते हैं और अधिकांश ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
  • महासागरों में विभिन्न प्रकार के जीवन रक्षक औषधीय यौगिकों की खोज की गई है, जिनमें सूजन-रोधी और कैंसर-रोधी दवाएं शामिल हैं।
  • महासागर विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। लगभग 90% से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और यह लाखों लोगों के लिए रोजगार के स्रोत भी हैं।

महासागरों के लिए खतरा:

  • जीवाश्म ईंधन के व्यापक उपयोग के कारण प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने, आक्रामक प्रजातियां और समुद्र की बढ़ती अम्लता।
  • ‘प्लास्टिक कचरा’ भी आज महासागरों के सामने सबसे बड़े खतरों में से एक है।