Print Friendly, PDF & Email

[Mission 2022] INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 4 June 2022

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

  1. वीर सावरकर

सामान्य अध्ययन-II

  1. राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण

सामान्य अध्ययन-III

  1. बारकोड बनाम रेडियो-आवृत्ति पहचान टैग
  2. इको सेंसिटिव जोन
  3. ग्रीन बांड

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. तुर्किए
  2. मार्टिन एन्नेल्स अवार्ड
  3. रिबन खरपतवार / रिबन वीड
  4. विश्व साइकिल दिवस
  5. पुनीत सागर अभियान
  6. श्रेष्ठ योजना

 


सामान्य अध्ययनI


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

वीर सावरकर


28 मई 2022 को वीर सावरकर की 139वीं जयंती मनायी गयी।

 

वीर सावरकर के बारे में:

विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में भागुर शहर में हुआ था।

राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार:

  • इन्होने, ‘मित्र मेला’ नामक एक युवाओं के संगठन का गठन किया था। इस संगठन की स्थापना राष्ट्रीय और क्रांतिकारी विचार उत्पन्न करने के लिए की गयी थी।
  • वह विदेशी वस्तुओं के विरोधी थे और ‘स्वदेशी’ के विचार का समर्थन करते थे।
  • उन्होंने नास्तिकता और तार्किकता का समर्थन किया और रूढ़िवादी हिंदू विचारों का खंडन किया। वास्तव में, उन्होंने गाय की पूजा को भी अंधविश्वास कह कर खारिज कर दिया।
  • विनायक सावरकर , वर्ष 1937 से 1943 के दौरान हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे।
  • 22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस मंत्रालयों द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के बाद, इनके नेतृत्व में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सिंध, बंगाल और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत (NWFP) प्रांतों में सरकार बनाने के लिए सहयोग किया।
  • सावरकर ने, पुणे में, “अभिनव भारत समाज” नामक संगठन की स्थापना की।
  • इन्होने, लोकमान्य तिलक की स्वराज पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की।
  • इन्होंने ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की। इस सोसायटी के द्वारा त्योहारों, स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी प्रमुख घटनाओं सहित भारतीय कैलेंडर की महत्वपूर्ण तिथियों को मनाया जाता था और यह भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित थी।
  • वह भारत को अंग्रेजों से मुक्त करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने पर यकीन और समर्थन करते थे और इन्होने इंग्लैंड में, हथियारों से लैस भारतीयों का एक नेटवर्क भी तैयार किया।

महत्वपूर्ण कार्य:

  1. पुस्तक- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास।
  2. मॉर्ले-मिंटो सुधार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह।
  3. ‘हिंदुत्व’ नामक पुस्तक में दो-राष्ट्र सिद्धांत।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मित्रा मेला, अभिनव भारत सोसाइटी और फ्री इंडिया सोसाइटी की स्थापना किसने की थी? इनके उद्देश्य क्या थे?
  2. सावरकर द्वारा लिखित पुस्तकें?
  3. सावरकर की पुस्तक, जो मैडम भीकाजी कामा द्वारा प्रकाशित की गई थी?

मेंस लिंक:

देश में होने वाले सामाजिक सुधारों में वीर सावरकर के योगदान पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययनII


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

 राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण


संदर्भ:

हाल ही में, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा नवीनतम ‘राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण’ (National Achievement Survey – NAS) के परिणाम जारी किए गए।

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) का पहला संस्करण 2001 में किया गया था।

‘राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षणके बारे में:

  • यह देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली के स्वास्थ्य की निगरानी करने के लिए मोटे तौर पर हर दूसरे वर्ष किया जाने वाला एक आवधिक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण है।
  • ‘राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण’, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के सहयोग से शिक्षा मंत्रालय द्वारा डिजाइन किया गया है।
  • उद्देश्य: कक्षा 3, 5, 8 और 10 के अंत में प्रमुख विषयों में सीखने के परिणामों का एक तात्कालिक चित्र प्रदान करना। इन कक्षाओं को आम तौर पर एक बच्चे की संज्ञानात्मक क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण चरणों को चिह्नित करने के रूप में देखा जाता है।

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण, 2021 (NAS 2021) के प्रमुख निष्कर्ष:

  • वर्ष 2017 की तुलना में, सभी विषयों में छात्रों के राष्ट्रीय औसत अंकों में 47 अंकों तक की गिरावट आई है।
  • कक्षा 3 में, भाषा, गणित और पर्यावरण विज्ञान में छात्रों के औसत अंकों में गिरावट आई है।
  • कक्षा 5 में, भाषा, गणित और पर्यावरणीय अध्ययन के अंकों में गिरावट आई है।
  • कक्षा 8 में भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के राष्ट्रीय औसत अंकों में गिरावट देखी गई है।
  • कक्षा 10 में, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और आधुनिक भारतीय भाषा के अंकों में गिरावट आई है।

क्षेत्रीय, लैंगिक या समुदाय-वार भिन्नताएं:

  • पंजाब और राजस्थान को छोड़कर, लगभग सभी राज्यों के प्रदर्शन में 2017 के स्तर की तुलना में गिरावट आई है।
  • लड़कों और लड़कियों के स्कोर के बीच कोई उल्लेखनीय अंतर नहीं रहा।
  • हालाँकि, अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति /अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के छात्रों का प्रदर्शन सामान्य श्रेणी के छात्रों की तुलना में कम रहा।

इन निष्कर्षों के निहितार्थ:

  • राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के निष्कर्ष एक बार फिर बुनियादी शिक्षण के स्तर में सुधार के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता को स्पष्ट करते हैं।
  • यह सर्वेक्षण, सीखने के अंतराल की समस्या को सुलझाने में मदद करेगा और सीखने के स्तर में सुधार करने हेतु दीर्घकालिक, मध्यावधि और अल्पकालिक हस्तक्षेप विकसित करने में राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों का समर्थन करेगा।
  • NAS के निष्कर्ष शिक्षकों, शिक्षा के प्रसार में शामिल अधिकारियों के लिये क्षमता निर्माण में मदद करेंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS)
  2. पैरामीटर
  3. NAS के नवीनतम संस्करण के प्रमुख बिंदु।

मेंस लिंक:

नवीनतम राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) के नवीनतम परिणामों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययनIII


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

बारकोड बनाम रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग


संदर्भ:

शीघ्र ही, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ‘रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) युक्त ‘बैगेज टैग’ (Baggage tags) उपलब्ध होंगे। यह देश में अपनी तरह की पहली सुविधा होगी।

RFID के बारे में:

‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID), एक ‘टैग’ और ‘रीडर’ से बना एक ‘वायरलेस ट्रैकिंग सिस्टम’ है।

  • इस ‘ट्रैकिंग सिस्टम’ में वस्तुओं या लोगों की जानकारी/पहचान को संप्रेषित करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है।
  • इसमें प्रयुक्त ‘टैग’ में एन्क्रिप्टेड जानकारी, सीरियल नंबर और संक्षिप्त विवरण दर्ज किए जा सकते हैं।

प्रकार – निष्क्रिय और सक्रिय RFID टैग:

  1. सक्रिय आरएफआईडी (Active RFIDs) अपने स्वयं के उर्जा स्रोत, ज्यादातर बैटरी का उपयोग करते हैं।
  2. निष्क्रिय आरएफआईडी (Passive RFIDs) को, पाठक के माध्यम से ‘विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा’ प्रसारण का उपयोग करके सक्रिय किया जाता है।

कार्यविधि:

  • आरएफआईडी टैग कई अलग-अलग आवृत्तियों – निम्न आवृत्ति (low frequency), उच्च आवृत्ति (High Frequency – HF) और अल्ट्रा-उच्च आवृत्ति (ultra-high frequency – UHF) – पर रेडियो तरंगों का उपयोग करके ‘रीडर’ (पाठक) के साथ संवाद करने के लिए एक एकीकृत सर्किट और एंटीना का उपयोग करते हैं।
  • ‘टैग’ द्वारा ‘रेडियो तरंगों’ के रूप में वापस भेजे गए संदेश को डेटा में अनुवादित किया जाता है और इसका होस्ट कंप्यूटर सिस्टम द्वारा विश्लेषण किया जाता है।
  • बारकोड के विपरीत, RFID को वस्तुओं की पहचान करने के लिए ‘सीधी दृष्टि’ की आवश्यकता नहीं होती है।

‘बारकोड’ क्या होते हैं?

‘बारकोड’ (Barcode), कंप्यूटर सिस्टम में डेटा दर्ज करने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘समानांतर पट्टियों अथवा भिन्न-भिन्न चौड़ाई वाली रेखाओं की एक मुद्रित अनुक्रम (सीरीज) होते हैं।

  • ‘बारकोड’ की पट्टियाँ सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग की होती हैं और अनुप्रयोग के आधार पर इनकी चौड़ाई और संख्या में भिन्नता होती है।
  • ये पट्टियाँ / शलाकाएँ (BARS), बाइनरी अंकों- शून्य और एक – का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाइनरी संख्याएं एक डिजिटल कंप्यूटर द्वारा संसाधित ‘शून्य’ से ‘नौ अंकों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं।
  • इन बारकोड को विशेष ‘ऑप्टिकल स्कैनर’ से स्कैन किया जाता है जिसे ‘बारकोड रीडर’ कहा जाता है।
  • इनमें से अधिकांश कोड्स में केवल दो अलग-अलग चौड़ाई के ‘बार’ का उपयोग किया जाता है, हालांकि कुछ कोड्स में ‘भिन्न प्रकार की चार चौड़ाईयों’ का उपयोग होता है।
  • ‘क्यूआर कोड’ (QR code), बारकोड के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक है।

 

RFID और बारकोड के बीच अंतर:

  1. ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) में ‘संचार’ के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है, और इस तकनीक में डेटा प्राप्त करने के लिए सीधी नजर या दृष्टि की आवश्यकता नहीं होती है; जबकि, बारकोड में ‘स्टिकी टैग’ पर मुद्रित श्वेत-श्याम पैटर्न को पढ़ने के लिए प्रकाश का उपयोग किया जाता है।
  2. RFID टैग, भले ही टैग क्रियाशील न हो, फिर भी एक क्रियाशील या चालू रीडर के साथ ‘संचार’ कर सकता है।
  3. कागज या स्टिकी लेबल पर मुद्रित होने पर, ‘बारकोड’ के घिस जाने या फट जाने का खतरा रहता है, जोकि इनकी पठनीयता को प्रभावित कर सकता है। RFID टैग, बारकोड की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं।
  4. ‘बारकोड स्कैनर’ के विपरीत, RFID स्कैनर एक सेकंड में दर्जनों टैग को प्रोसेस कर सकता है।
  5. ‘बारकोड’ सरल और नकल करने में आसान होते है और नकली बारकोड्स को आसानी से बनाया जा सकता है, जबकि RFID अधिक जटिल होते है और इनकी नक़ल करना कठिन होता है।
  6. बारकोड की तुलना में RFID टैग महंगे होते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RFID के बारे में।
  2. रेडियो फ्रीक्वेंसी।
  3. ऑप्टिकल संचार प्रणाली।
  4. संबंधित नासा मिशन।

मेंस लिंक:

नासा के LCRD के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र


संदर्भ:

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, देश भर में प्रत्येक संरक्षित वन, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य में, उनकी निर्धारित सीमाओं से न्यूनतम एक किमी भीतर तक अनिवार्य ‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (Eco-Sensitive Zone- ESZ) होना चाहिए।

संबंधित प्रकरण:

  • शीर्ष अदालत का यह फैसला तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में ‘वन भूमि की सुरक्षा’ के संबंध में दायर एक याचिका पर आया है।
  • इसके बाद, अदालत ने उक्त रिट याचिका के दायरे में विस्तार कर दिया ताकि, पूरे देश में ऐसे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जा सके।

शीर्ष अदालत के निर्देश:

  1. यदि किसी ‘राष्ट्रीय उद्यान’ या ‘संरक्षित वन’ में पहले से ही एक किमी से अधिक का ‘बफर ज़ोन’ है, तो उसे ही अनिवार्य ‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (ESZ) के रूप में मान लिया जाएगा।
  2. यदि ‘बफर ज़ोन’ की सीमा का प्रश्न वैधानिक निर्णय के लिए लंबित है, तो ‘एक किलोमीटर तक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने के लिए अदालत का निर्देश’, कानून के तहत अंतिम निर्णय आने तक लागू रहेगा।
  3. राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभ्यारण्यों के भीतर खनन की अनुमति नहीं होगी।
  4. राज्यों के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं गृह सचिव, अदालत के इस निर्णय के अनुपालन के लिए उत्तरदायी होंगे।

‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (ESZ) के बारे में:

  1. इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) अथवा पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Fragile Areas- EFAs), संरक्षित क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित क्षेत्र होते हैं।
  2. किसी क्षेत्र को ‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (ESZ) घोषित करने का उद्देश्य, इन क्षेत्रों में गतिविधियों को विनियमित और प्रबंधित करके संरक्षित क्षेत्रों में एक प्रकार का ‘आघात-अवशोषक’ (shock absorbers) बनाना होता है।
  3. ये क्षेत्र, उच्च-संरक्षित क्षेत्रों तथा निम्न संरक्षित वाले क्षेत्रों के मध्य एक संक्रमण क्षेत्र के रूप में भी कार्य करते हैं।
  4. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 में “इको-सेंसिटिव जोन” शब्द का उल्लेख नहीं है।
  5. वन्यजीव संरक्षण रणनीति, 2002 के अनुसार, किसी संरक्षित क्षेत्र के आसपास 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को एक ESZ घोषित किया जा सकता है।
  6. इसके अलावा, जहां संवेदनशील गलियारे, कनेक्टिविटी और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण भाग, परिदृश्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र, 10 किमी के क्षेत्र से आगे स्थित हैं, तो इन क्षेत्रों को भी ESZ में शामिल किया जा सकता है।

ESZ का महत्व:

  • राष्ट्रीय उद्यानों, जंगलों और अभयारण्यों के आसपास ‘इको-सेंसिटिव जोन’ (ESZ) घोषित करने का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों को किसी भी तरह के खतरों से बचाने के लिए एक ‘क्षति अवशोषक’ (Shock Absorber) का निर्माण करना है।
  • ये ‘इको-सेंसिटिव जोन’, अधिक संरक्षित क्षेत्रों एवं कम सुरक्षा वाले क्षेत्रों के बीच ‘संक्रमण क्षेत्र’ के रूप में कार्य करेंगे।

समय की मांग:

  • खनन और अन्य गतिविधियों की वजह से देश के प्राकृतिक संसाधन वर्षों से बरबाद हो रहे हैं।
  • इसलिए, सरकार को अपनी भूमिका, मात्र “राज्य के तत्काल उत्थान” के लिए आर्थिक गतिविधियों के “सुधारक” की भूमिका तक सीमित नहीं करना चाहिए।
  • सरकार को प्राकृतिक संसाधनों के संबंध में आम जनता के लाभ के लिए एक ट्रस्टी के रूप में कार्य करना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक विकास हासिल किया जा सके।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र’ किस प्रकार घोषित किया जाता है?
  2. ESZ की सीमा
  3. वायनाड एवं नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व के बारे में

मेंस लिंक:

संरक्षित क्षेत्रों के आसपास ‘पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र’ की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ग्रीन बांड


संदर्भ:

यदि भारत अपनी पहली ‘सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड’ (Sovereign Green Bond) बिक्री को जारी रखता है, तो भारत को एक कठिन लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि, ‘सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड’ बिक्री का उद्देश्य अधिकांश विदेशी निवेशकों को दूर करते हुए ‘प्रतिभूतियों’ को ‘रुपये’ में जारी करना है।

संबंधित प्रकरण:

भारत के लिए यह समय, खासकर रुपये जारी करने के लिए संभवतः उपयुक्त नहीं है ।

इस वर्ष मुद्रा में 4% से अधिक की गिरावट आई है और भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति से निपटने में निर्धारित वक्र के पीछे है, इसके अलावा,  कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ शुद्ध आयात पर दबाव बढ़ रहा है।

‘ग्रीन बॉन्ड’ के बारे में:

‘ग्रीन बॉन्ड’ (Green Bond), एक प्रकार का ‘निश्चित आय’ उपकरण है, जिसे विशेष रूप से जलवायु और पर्यावरण संबंधित परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए निर्धारित किया जाता है।

  • ये बांड, आम तौर पर किसी परिसंपत्ति से संबद्ध होते हैं, और जारीकर्ता इकाई की बैलेंस शीट द्वारा समर्थित होते हैं, इसलिए इन बांड्स को प्रायः जारीकर्ता के अन्य ऋण दायित्वों के समान ‘क्रेडिट रेटिंग’ दी जाती है।
  • निवेशकों को आकर्षित करने हेतु ‘ग्रीन बांड’ में निवेश करने पर प्रोत्साहन के रूप में ‘करों’ आदि से कुछ छूट के साथ भी जारी किया जाता सकता है।
  • विश्व बैंक, ‘हरित बांड’ / ग्रीन बांड’ जारी करने वाली एक प्रमुख संस्था है।

‘ग्रीन बॉन्ड’ की कार्य-प्रणाली:

ग्रीन बॉन्ड, किसी भी अन्य कॉरपोरेट बॉन्ड या सरकारी बॉन्ड की तरह ही काम करते हैं।

  • ऋणकर्ताओं द्वारा इन प्रतिभूतियों को, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली या प्रदूषण को कम करने जैसे ‘सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव’ डालने वाली परियोजनाओं के ‘वित्तपोषण’ को सुरक्षित करने के लिए जारी किया जाता है।
  • इन बांडों को खरीदने वाले निवेशक, इनके परिपक्व होने या अवधि पूरी होने पर, उचित लाभ अर्जित करने की उम्मीद कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, ग्रीन बॉन्ड में निवेश करने पर अक्सर ‘कर’ संबंधी लाभ भी प्राप्त होते हैं।

ग्रीन बॉन्ड बनाम ब्लू बॉन्ड:

‘ब्लू बॉन्ड’ (Blue Bonds), समुद्र और संबंधित पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा हेतु परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए जारी किए जाने वाले ‘संधारणीयता बांड’ होते हैं।

  • यह बांड, संवहनीय मत्स्य पालन, प्रवाल भित्तियों और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा, अथवा प्रदूषण और अम्लीकरण को कम करने वाली परियोजनाओं के लिए जारी किए जा सकते हैं।
  • सभी ब्लू बॉन्ड, ‘ग्रीन बॉन्ड’ होते हैं, लेकिन सभी ‘ग्रीन बॉन्ड’, ब्लू बॉन्ड नहीं होते हैं।

‘ग्रीन बांड बनाम जलवायु बांड’

“ग्रीन बॉन्ड्स” और “क्लाइमेट बॉन्ड्स” को कभी-कभी एक-दूसरे के पर्यायवाची की तरह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ‘क्लाइमेट बॉन्ड्स’ शब्द को कुछ अधिकारी, विशेष रूप से कार्बन उत्सर्जन को कम करने या जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने पर केंद्रित परियोजनाओं के लिए उपयोग करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रीन बांड’ के बारे में
  2. कार्य-प्रणाली
  3. विशेषताएं
  4. ये ब्लू बांड से किस प्रकार भिन्न होते हैं।

मेंस लिंक:

ग्रीन बॉन्ड के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 तुर्किए

संयुक्त राष्ट्र ‘तुर्की’ (Turkey) द्वारा अपना नाम परिवर्तन किए जाने के औपचारिक अनुरोध पर सहमत हो गया है।

  • तुर्की को अब ‘तुर्किए’ (Türkiye) के नाम से जाना जाएगा।
  • स्थानीय स्तर पर, नागरिकों द्वारा अपने देश को ‘तुर्किये’ या ‘तुर्किए’ ही कहा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके अंग्रेजी संस्करण ‘तुर्की’ को अपनाया गया था।

तुर्की शब्द से जुड़े विवाद:

तुर्की सरकार ‘तुर्की’ शब्द के लिए ‘गूगल खोज’ करने पर आने वाले परिणामों से खुश नहीं थी।

  • इनमें से कुछ परिणामों में, उत्तरी अमेरिका में ‘थैंक्सगिविंग’ और ‘क्रिसमस भोजन’ के लिए परोसा जाने वाला ‘टर्की’ (Turkey) नामक बड़ा पक्षी भी मिलता है।
  • कैम्ब्रिज डिक्शनरी की परिभाषा के अनुसार, “टर्की” शब्द का अर्थ “कुछ ऐसा जो बुरी तरह से विफल हो जाता है” या “बेवकूफ या मूर्ख व्यक्ति” होता है।

current affairs

 

मार्टिन एन्नेल्स अवार्ड

यह पुरुस्कार जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित ‘मार्टिन एन्नेल्स फाउंडेशन’ द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।

  • इस पुरुस्कार को ‘मानवाधिकार रक्षकों के लिए नोबेल पुरस्कार’ के रूप में माना जाता है।
  • इस साल झारखंड के एक जेसुइट पुजारी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता ‘फादर स्टेन स्वामी’ को श्रद्धांजलि देने के लिए मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया गया है।‘फादर स्टेन स्वामी’ को भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किया गया था और हिरासत के दौरान ही उनकी बीमारी से मृत्यु हो गयी थी।

मार्टिन एन्नेल्स के बारे में:

  • मार्टिन एन्नेल्स (Martin Ennals) एक ब्रिटिश कार्यकर्ता थे जिन्होंने अपना जीवन दुनिया भर में मानवाधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए काम करते हुए बिताया।
  • वह 1968 से 1980 तक एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव रहे।
  • एन्नेल्स ने अनुच्छेद 19, अंतर्राष्ट्रीय अलर्ट और हरिडॉक्स (Huridocs) जैसे कई संगठनों की सह-स्थापना भी की।

 

रिबन खरपतवार / रिबन वीड

  • वैज्ञानिक नाम: पोसिडोनिया ऑस्ट्रेलिस (Posidonia australis)।
  • रिबन खरपतवार (Ribbon weed), विश्व का सबसे बड़ा पौधा है। यह 180 किमी तक लंबी एक समुद्री घास होती है।
  • इसे हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर ‘शार्क खाड़ी’ में खोजा गया है।
  • यह पौधा 4,500 वर्ष पुराना है और अन्य समान पौधों की तुलना में, इसमें ‘गुणसूत्रों’ की संख्या दोगुनी है।
  • रिबन खरपतवार, आमतौर पर प्रति वर्ष लगभग 35 सेमी तक बढ़ सकता है।
  • यह 20,000 हेक्टेयर के क्षेत्र में फ़ैली हुई है।
  • इसी तरह का दूसरा सबसे बड़ा पौधा, अमेरिका के ‘यूटा’ में एक ‘क्वेकिंग एस्पेन ट्री का क्लोनल कॉलोनी’ (clonal colony of a quaking Aspen tree) है, जो 43.6 हेक्टेयर में विस्तारित है।
  • भारत का सबसे बड़ा वृक्ष, हावड़ा के बॉटनिकल गार्डन में ‘ग्रेट बरगद’ है जोकि 1.41 हेक्टेयर में फैला हुआ है।

current affairs

 

 

विश्व साइकिल दिवस

  • हर साल 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ (World Bicycle Day) मनाया जाता है।
  • यह दिवस, साइकिल का उपयोग करने के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह दिन साइकिल की विशिष्टता, टिकाऊपन और बहुमुखी क्षमताओं पर प्रकाश डालता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें नियमित सत्र के दौरान ‘संयुक्त राष्ट्र’ द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद 2018 से यह दिवस हर साल मनाया जा रहा है।

current affairs

पुनीत सागर अभियान

  • हाल ही में, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) ने अपने राष्ट्रव्यापी फ्लैगशिप अभियान ‘पुनीत सागर अभियान’ (Puneet Sagar Abhiyan) का नवीनतम चरण शुरू किया है।
  • उद्देश्य: समुद्र तटों/समुद्र तटों और नदियों और झीलों सहित अन्य जल निकायों से प्लास्टिक और अन्य कचरे को साफ करना और स्थानीय आबादी के बीच समुद्र तटों और नदी के किनारों को साफ रखने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

 

श्रेष्ठ योजना

हाल ही में, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लक्षित क्षेत्रों के हाई स्‍कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा की योजना “श्रेष्ठ” (SHRESHTA – Scheme for residential education for students in High school in Targeted Areas) की शुरूआत की गयी

  • यह योजना अनुसूचित जाति के उन छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी जिनकी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक पहुंच अब तक नहीं हो सकी है।
  • ‘लक्षित क्षेत्रों के उच्च विद्यालयों में छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा की योजना’ (श्रेष्ठ) का निर्माण, संवैधानिक अधिदेश के अनुसार, अनुसूचित जाति के गरीब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।
  • यह योजना, पूरे देश की सीबीएसई से संबद्ध प्रतिष्ठित आवासीय स्कूलों में मेधावी लेकिन गरीब अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करती है।
  • पात्रता: वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 8 और 10 में पढ़ने वाले अनुसूचित जातियों के छात्र योजना का लाभ उठा सकते हैं। अनुसूचित जाति समुदाय के हाशिए पर रहने वाले निम्न आय वर्ग के छात्र, जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक या उससे कम है, इसके पात्र हैं।
  • चयन: लाभार्थियों का चयन एक पारदर्शी तंत्र के माध्यम से श्रेष्ठ के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षा के माध्यम से होगा, जो कक्षा 9 और 11 में नामांकन के लिए आयोजित की जाती है।